मौत सामने खड़ी थी

बुधवार, 31 अक्तूबर 2018


दंतेवाड़ा के हमले में नक्सलियों ने बाल नक्सलियों का भी इस्तेमाल किया। इलाके में 200 से ज्यादा नक्सली थे जिन्होंने जवानों और मीडिया टीम को घेर लिया था।

हमले से जिंदा बच आए जवान विष्णु नेताम ने यह बताया है कि नक्सलियों की टीम में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे जिनकी उम्र 10 - 12 साल रही होगी। इन बच्चों की आड़ लेकर नक्सलियों ने एंबुश लगाकर फायरिंग शुरू कर दी थी। इस हमले में एक मीडियाकर्मी सहित चार जवान शहीद हो चुके हैं। घायल का इलाज रामकृष्ण केयर अस्पताल में जारी है। विष्णु नेताम के बयान के मुताबिक 30 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे हम निकले थे। दूरदर्शन की टीम हमें रास्ते में मिली और फिर वह भी हमारे साथ हो गए मगर रास्ते में नक्सलियों ने चारों ओर से अचानक घेर लिया। 
 "हैंड ग्रेनेड दागे गए एके-47 से गोलियों की बौछार की गई और उसके बाद हम लोग गड्ढे में कूद गए। विष्णु ने बताया मैं दूसरे नंबर पर था। मेरे आगे रुद्र प्रताप सिंह थे जो सब इंस्पेक्टर थे जिन्हें बचने का भी मौका नहीं मिला और उनकी मौत हो गई।"

हमले का वीडियो बना लिया 

दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में ज़िंदा बच गए दूरदर्शन के सहायक कैमरामैन मोर मुकुट शर्मा ने हमले का पूरा वीडियो बना लिया और अब वे मौत के मुंह से बच निकलने के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।
 उनका वीडियो बताता है कि सनसनाती गोलियों की आवाज के बीच के भयानक हालात क्या रहे थे। खौफ का आलम क्या रहा होगा। लाइटमैन ने हमले के दौरान अपना और मौजूद पुलिसकर्मियों का वीडियो बनाया है। वीडियो में अपनी मां को याद कर रहा है और पानी मांग रहा है लेकिन जवानों के पास पानी नहीं था मगर वे बराबर उसे दिलासा देते रहे कि फोर्स आ चुकी हैं। वीडियो में कहा गया कि मम्मी मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं। हो सकता है इस हमले में मैं मारा जाऊं। परिस्थिति सही नहीं है। पता नहीं क्यों? मौत को सामने देखते हुए डर नहीं लग रहा है। बचना मुश्किल है यहां पर। 
कुल1 मिनट 27 सेकेंड के अपने संदेश में कैमरामैन मोर मुकुट ने रिकार्ड किया। चुनाव कवरेज के लिए जाते समय अचानक नक्सलियों ने उन्हें घेर लिया। परिस्थिति सही नहीं है और पता नहीं मैं कब मारा जाऊं। मम्मी मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं। मौत सामने घूम रही है और पता नहीं कि मैं लौटूंगा या नहीं।

गौरतलब है दंतेवाड़ा नीलवाय जा रही दूरदर्शन की टीम पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था। पता चला है कि हमले के दौरान कैमरामैन आगे-आगे चल रहा था जबकि रिपोर्टर और लाइटमैन पीछे थे। गोलीबारी शुरू होते ही दोनों एक गड्ढ़े में गिर गये और पूरी गोलीबारी तक वहीं छुपे रहे जिससे उनकी जानें बच गई। पुलिस कर्मी उनको कवर करके फायरिंग करते रहे।

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सहारा दफ्तर में नक्सली

शुक्रवार, 12 अक्तूबर 2018


छत्तीसगढ़  के जय स्तंभ चौक रायपुर स्थित समय  में बुधवार को एक कथित नक्सली ने पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण किया। खुद को नक्सली बताने वाले विष्णु उर्फ विनोद क्षेत्री ने दावा किया कि वह महासमुंद दलम के लिए सक्रिय रहा है और उसने कहा कि सहारा की विश्वसनीयता की वजह से वह दफ्तर आया और उसे उम्मीद है कि उसके साथ न्याय होगा।
बुधवार को सुबह कोई 10: 30 बजे का समय था। सहारा समय रायपुर के दफ्तर में सामान्य दिनों की तरह काम चल रहा  था। अचानक एक सावला सा आदमी सिर पर टोपी लगाए हुए दफ्तर में घुस आया और आते ही उसने कहा "मुझे किसी जिम्मेदार व्यक्ति से मिलना है" जब उससे मुलाकात की गई और कमरे ने कुर्सी पर बैठ कर जब उसने अपना परिचय दिया तो सभी एकबारगी सकपका ही गए। उसने कहा मैं एक नक्सली हूं और मैं आप के मार्फत आत्मसमर्पण करना चाहता हूं। शुरू में तो लगा यह कोई सिरफिरा हो सकता है मगर उसका हाव-भाव, खास तरह की आक्रामक तेजतर्रारी देखकर समय के प्रदेश प्रभारी दीपक विश्वकर्मा ने सीधे नोएडा मुख्यालय को सूचना दी।  वहां से यह तय हुआ कि इस व्यक्ति का सीधा परिचय " समय" के दर्शकों से कराया जाए और लगे हाथ कानूनी तौर पर पुलिस को इत्तला भी की जाए।
 उस व्यक्ति ने सीधे प्रसारण में बताया कि वो महासमुंद दलम का सदस्य है और सहारा को उसने इसलिए चुना क्योंकि मीडिया में उसका इस ग्रुप पर पूरा भरोसा है। पुलिस के पास इसलिए नहीं जाना चाहता क्योंकि उसे भरोसा नहीं है। उसने उम्मीद जताई कि उसे सरेंडर पॉलिसी का लाभ भी मिलेगा।
 बाद में इत्तला पा कर छत्तीसगढ़ के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच के एसपी डी रवि शंकर दफ्तर में आए और उन्होंने कैमरे के सामने यह भरोसा दिया कि पहले उसकी तस्दीक की जाएगी और उसके बाद तमाम औपचारिकताएं पूरी करके उसे न्याय दिलाया जाएगा।

 नक्सली ने यह बयान दिया कि माओवाद से उसका मोह भंग हो चुका है और वह समाज की मुख्य धारा में आना चाहता है। उसने बताया कि उसके और साथी भी बाद में सरेंडर करेंगे। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है।
गौरतलब है कि बस्तर में नक्सली अब हिंसा से आजिज हैं और लगातार आत्म समर्पण कर रहे हैं। बस्तर में शांति बहाली की दिशा में यह एक शुभ संकेत माना जा रहा है।

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डा रमन सिंह के 14 साल

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017


मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार के लगातार 14 साल पूरे कर गए हैं। इस महीने 12 दिसम्बर को डॉ. सिंह अपनी तीसरी पारी के कार्यकाल के चार वर्ष पूर्ण कर पांचवे वर्ष में प्रवेश करेंगे। विगत 7 दिसंबर को उन्होंने 14 साल का रिकार्ड समय पूरा कर लिया।

लगातार पांच हजार दिन पद पर रहने का रिकार्ड बनाने वाले डा.सिंह इतने लम्बे समय तक सीएम बनने वाले भाजपा शासित राज्य के पहले सीएम हैं।
आज देर सांय चुनिंदा मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में रमन सिंह ने कहा कि अगले साल नवंबर में विधानसभा के चुनाव हैं मगर सरकार पूरे राज्य को विद्युतीकृत करने और ओडीएफ Open Defecation Free (ODF) स्टेट बनाने के लिए कृतसंकल्पित है।

आज उन्होंने अफसरों के बीच कहा कि ग्लोबल ग्लोबल रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Credit Rating Information Services of India Limited) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को नागरिक सेवाओं लिए देश का प्रथम, रोजगार उपलब्ध कराने में द्वितीय, मैन्यूफ्रेचरिंग, व्यापार, परिवहन और संचार सुविधाओं में द्वितीय स्थान दिया है।  14 वर्ष में राज्य में सड़क नेटवर्क और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में भी सफलता मिली है। प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूल तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 21 हजार 600 से बढ़कर 62 हजार तक पहुंच गई है। 
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्य में विपक्ष इसी तरह काम करता रहे तो अगली पारी भी भाजपा की होगी।
उन्होंने राज्य में हाथियों के बढ़ते उत्पात पर कहा पडोसी राज्यों में चारे की समस्या है। इस समस्या से व्यवस्थित ढंग से निपटा जा रहा है।

 तेंदूपत्ता तिहार में भाग लेने के लिए अजित जोगी के गढ़ मरवाही पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि जोगी की पार्टी की चुनौती से इंकार नहीं किया जा सकता। जोगी की पार्टी प्रदेश में तीसरी पार्टी के तौर पर तेजी से उभर रही है। अगले साल होने वाले चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष मानकर चल रहा हूं।

 दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव डॉ. सिंह ने कहा विश्व बैंक, नाबार्ड और जिला खनिज न्यास निधि से सहायता लेकर प्रदेश के भवनविहीन सभी 633 छात्रावास और आश्रम शालाओं के भवनों का निर्माण किया जाएगा। इन भवनों के निर्माण में लगभग ढाई हजार करोड़ रूपए की लागत जाएगी।
   
   


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ग़म दिये मुस्तक़िल, इतना नाज़ुक है दिल ...

रविवार, 26 नवंबर 2017


voice - ramesh sharma


     
film/Shahjehan (1946)

Singer: K L Saigal 

Music: Naushad  

              Lyrics: Majrooh Sultanpuri.  

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18वें बरस में छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

नवंबर 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य छत्तीसगढ़ बना था।  एक छोटे से राज्य के रूप में उदित हुआ छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 18वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। विकास तो हुआ है जो बताने के काबिल है। एक छत्तीसगढ़ जो स्मार्ट सिटी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और दीगर शहरों में नजर आता है जहां कुछ ख़ास इलाकों में अचंभित कर देने वाली शान का किसी आदिवासी को सहमा देने वाला रूतबा है, प्रगति पथ की धाक है, चमचमाती हाई मास्ट लाईटें हैं और दूसरी तरफ बहुतेरे छोटे खूबसूरत गांव -कस्बे हैं ..जहां नागरिक सुविधाएं और एक समूची पीढ़ी को गांव में ही टिकाए रखने के अवसर चाहिए .. शहर और गांव के बीच की खाई है.. यह बताता है कि सफर अभी बहुत लंबा है..मीलों चलना है।



राज्योत्सव में लोगों को संगीत और लोकनृत्य के अनेक रंग देखने को मिले..  ख़ास तौर पर आए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में शहीद जवानों को याद किया । उन्होंने कहा कि जवानों ने कुर्बानी नहीं दी होती तो आज हम यह उत्सव भी नहीं मना रहे होते। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने नया रायपुर में पांच दिवसीय राज्योत्सव का शुभारंभ किया।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रायपुर आ कर कहा कि आयोग ने राज्य सरकार को आश्वासन दिया है कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए नीति आयोग पूरी मदद करेगा. कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेज गति से विकास हुआ है और इसे और तेज होना है. आदिवासी क्षेत्रों में जहां गरीबी ज्यादा है, वहां और भी बेहतर काम करने की जरुरत है. वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अधिक काम करने की जरुरत है.
उन्होंने कहा कि राज्य में कुपोषण तथा संपर्क साधनों पर भी काम करने की जरूरत है. यहां बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां रेल, सड़क और टेलीकॉम की सुविधा अन्य स्थानों के मुकाबले कम है. इस क्षेत्र में भी काम करने की जरूरत है.

कुछ मसले अहम् हैं। छत्तीसगढ़-झारखंड-उड़ीसा  के सीमाई जंगलों में उन्मत जंगली हाथियों के झुंडों और इंसानी बस्तियों के बीच अरसे से भिड़ंत चल रही है। वर्चस्व कायम रखने के इस शुध्द नैसर्गिक संघर्ष में फिलहाल हाथी ही आगे हैं लेकिन जब भी हाथियों को गुस्सा आता है, वे मानव बस्तियों में घुसकर उन्हें रौंद डालते हैं और फसलों को जितना चट करते हैं, उससे  अधिक नुकसान पहुंचा जाते हैं।दरअसल, झारखंड अलग राज्य बनने के बाद वहां जारी उत्खनन और पेड़ों की कटाई के चलते हाथी जंगलों को छोड़ रहे हैं। वे झुंडों में चिंघाड़ते हुए राज्य की सीमाओं को चुनौती देते हैं। मूलत: शाकाहारी इस प्राणी ने इंसान की मुश्किल बढ़ाई जरूर है लेकिन उसकी मुश्किलें भी कम नहीं हैं। दांत वाले हाथी घात लगाकर गोली दागने वालों से डरे रहते हैं और लंबे अरसे तक हिंसक बने रहते हैं। उनसे छेड़छाड़, पथराव, बम-पटाखे, ढोल-नगाड़े बजाने जैसी कोशिशों के कारण उनका क्रोधित हो जाना स्वाभाविक है। नेचर क्लब बिलासपुर का मानना है कि वन्य प्राणियों का लगातार होता शिकार और उनके निवास क्षेत्र में इंसानी अतिक्रमण उनके अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी है। नवनिर्मित छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणी संरक्षण की नीति को कारगर बनाने की जरूरत है। सरकार को सुरक्षित वन क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्यों की सीमा रेखा में वन ग्रामों का सीमांकन करना चाहिए। वनों की कटाई हाथियों ही नहीं, दीगर जानवरों के लिए भी बेहद मुश्किलों का सबब बनती जा रही है।

पिछले कुछ समय में नक्सलवाद भारत की आन्तरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद कैंसर की तरह फैल चुका है और प्रथम स्टेज पर ही बीमारी को टालते रहने का नतीजा यह हुआ है कि अब यह पूरी तरह जानलेवा बन चुका है लेकिन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी हाल में इंटरव्यू में कहा कि विकास कार्यों के चलते नक्सलवाद की समस्या अपने अंतिम दौर में है।  देश में नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम लड़ाई छत्तीसगढ़ में होगी। बस्तर अंचल में नक्सल विरोधी अभियान जारी रहेगा।
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चुपचाप दफन..चौतरफा गूँज

शनिवार, 19 अगस्त 2017

इसी हफ्ते जब पूरा देश गौभक्त कृष्ण की जन्माष्टमी के धार्मिक उल्लास में डूबा हुआ था तब दुर्ग जिले की शगुन गौशाला में दर्जनों गौमाताएँ भूख-प्यास से तड़प कर बेमौत मर रही थीं।  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक की एक गोशाला में यकायक दो सौ से ज्यादा गायों की कारूणिक मौत...राजपुर गांव के गौशाला संचालक ने मरी हुई गायों को चुपचाप दफना दिया जिसकी चौतरफा गूँज हुई है ...

मामला तब फूटा जब सोशल मीडिया पर मरी हुई गायों की तस्वीरें वायरल हुईं। घटना की जानकारी गौशाला के संचालकों ने न तो प्रशासन को दी और ना ही पशुपालन विभाग -स्थानीय प्रशासन को सूचित किया। गांव के सरपंच सेवाराम साहू का कहना है 200 से ज्यादा गायों की मौत हुई है।  गौशाला में लगभग पांच सौ गाए हैं। बताया जा रहा कि इस गौशाला में भूख और प्यास के चलते हफ्ते भर के भीतर दो सौ से ज्यादा गायों की मौत हो गई।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इस गौशाला में ना तो चारा है और ना ही दाना-पानी और इसी वजह से गायों की मौत हुई है।   
राजपुर-धमधा की इस गौशाला के बाहर गेट पर  कमल का फूल यानि बीजेपी का चुनाव चिन्ह बना हुआ है।  इसे गौशाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और जामुल नगर पालिका के उपाध्यक्ष  बीजेपी  नेता हरीश वर्मा चलाते हैं। मुख्य विपक्षी कांगेस ने आरोप लगाया है कि गायों की मौत भूख के कारण हुई है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ज्ञानेश शर्मा  के मुताबिक धमधा में करीब 250 गायों की मौत, इससे पहले जुलाई में ही रायगढ़ जिले में स्थित चक्रधर गौशाला में 15 गायों की मौत और उससे भी पूर्व दुर्गुकोंदल के कर्रामाड़ में स्थित गौशाला में अगस्त 2016 में करीब 150 गायों की मौत, इन सब मामलों को देखकर साफ जाहिर होता है कि गौमाता को लेकर भाजपा सरकारों की कथनी और करनी में फर्क है। भाजपा के लिए गौमाता महज एक मुद्दा है जिसे लेकर वह जनता की भावनाओं से खेलती आई है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसी वर्ष 'गौहत्यारों को फांसी पर लटका देंगे' कहते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां जरुर बटोर ली थी  लेकिन लेकिन वे तो महज नए सिरे से सभी गौशालाओं के जांच के आदेश देने में व्यस्त हैं। साफ जाहिर है कि धमधा गौशाला का संचालक चूंकि भाजपा नेता है, इसलिए उसे बचाने ऐसा आदेश दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक अमरेश मिश्रा  के मुताबिक कि गौसेवा आयोग की शिकायत पर गायों की मृत्यु के मामले में हरीश वर्मा से पूछताछ की जाएगी।
एसडीएम ने भी घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि घटना की जांच के बाद ही जानवरों की मौत के कारणों का पता चल सकेगा।   गौशाला संचालक एवं भाजपा नेता हरीश वर्मा ने मीडिया
वालों से कहा कि 15 तारीख को क्षेत्र में तेज बारिश के कारण गौशाला की 90 फीट लंबी दीवार गिर गई थी। चोट लगने के कराण ही पिछले तीन दिनों में 27 गायों की मौत हुई है। वर्मा ने दावा किया कि पिछले एक साल से उन्हें गौशाला के लिए छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग से कोई भी अनुदान नहीं मिला है। हरीश वर्मा का बयान है कि उसे अनुदान नहीं मिलता था।  अनुदान के एवज में उससे  रिश्वत की मांग की जा रही थी। 

 मामला अब राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में उछल गया है लिहाजा  बची हुई गायों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के इंतज़ाम हो रहे हैं। गौशाला के क्रूर संचालक को गिरफ्तार करके आज कोर्ट में पेश किया जा रहा था तब उसके मुंह कालिख पोत दी गई।गायों की मौत से गुस्साए लोगों ने हरीश को लोगों  कालिख पोत दी। पुलिस वाले चुपचाप देखते रहे।

यह शर्मनाक हादसा ऐसे मौके पर हुआ है जब हाल में सरकार ने घोषणा की है कि राज्य में हादसों में घायल गायों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दस जिलों में एम्बुलेंस सेवा शुरू की जाएगी और 10 सबसे अच्छी गौशालाओं का चयन कर उन्हें दस-दस लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।

 राजपुर गांव में गौशाला की गाएं आजकल नुमाइश की चीज बन गई है. उनको देखने अफसरों की फ़ौज चली आ रही है है। हरे चारे के इंतज़ाम हो रहे हैं। डाक्टर तीमारदारी में लगे हैं जबकि तीन दिन पहले शगुन गौशाला के जिस मेन गेट पर  ‘कमल’बना हुआ है, दर्जनों गायें मौत के आगोश में जाती रही हैं। जो जिन्दा बची हैं उनके जिस्म की हड्डियां उनकी हालत और बेबसी की गवाह हैं, पसलियां साफ दिखाई देती हैं। गांव भर में पिछले हफ्ते भर में मौत की शिकार हुई कई गायों के अवशेष पड़े हैं। कुछ गौ-शव खेतों में सड़ रहे हैं और कुछ आवारा कुत्‍तों की खुराक बन रहे हैं।  अब दुर्गन्ध उठ रही है इलाके में और गायों के शवों को उठाने का कार्य नहीं किया गया है।  आवारा कुत्ते मृत गायों के शव को नोंच रहे हैं।  ग्रामीणों को शंका तब हुई और हल्ला मचा जब जेसीबी से गहरे गड्ढे खोदते और ट्रैक्‍टर में गायों के अवशेष ले जाते देखा गया। राजपुर गांव के सरपंच पति शिव राम साहू का कहना है कि आरोपी कभी किसी को गौशाला में घुसने नहीं देता था। जो गाएं बची हैं, उनके खाने पीने को कुछ नहीं है।
अब सनसनी फैली तो गौ सेवा आयोग भी जगा जबकि उनको पहले ही इस गौशाला के बारे में अनियमितता की शिकायतें मिलती रही है। आयोग ने संचालक को नोटिस जारी कर उससे जवाब तलब भी किया था लेकिन आरोपी हरीश वर्मा चूंकि जमूल नगर पंचायत क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष है लिहाजा उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ फाइलें नोटिसों से भरती रही।
गौ सेवा आयोग ने अब पाया कि 'गौशाला में गायों के चारे आदि की व्यवस्था बहुत ही खराब है। गौशाला में पहले भी गायों की मौत होती रही है, लेकिन उसे छिपाया जाता था।' लेकिन किसी भी अफसर ने कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस भी मूकदर्शक रही। हल्ला मचा तो संचालक को गिरफ्तार किया गया मगर थाने में नहीं रख कर उसे होटल में रखा गया।  छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने जारी बयान में कहा कि गौ-रक्षा, गौ-सेवा, गौ-सुरक्षा का दावा कर रही भाजपा का असली चेहरा उजागर हुआ है। जिस भाजपा नेता ने गौ-माता की सेवा के नाम पर 93 लाख रूपये डाकरे हों उसके व्यवस्थापन में 250 गायों की भूख से मौत हो जाना बेहद शर्मनाक घृणित और निंदनीय घटना है। इससे भी ज्यादा निंदनीय रवैया भाजपा सरकार का उस आरोपी को संरक्षण दिया जाना है। भाजपा नेता हरीश वर्मा गिरफ्तार का समाचार फैला पंरतु जिस थाने में उसकी गिरफ्तारी बतायी जा रही है, वहां वह नही मिला। उसे वीआईपी सुविधा प्रदान की जा रही है। उसे होटल में भोजन कराया जा रहा है।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने सगुन गौशाला मे 250 से अधिक गायों की मृत्यु प्रदेश को कलंकित करने वाली घटना निरूपित करते हुए कहा कि इस गौहत्याकांड ने भाजपा के दिखावटी गौ प्रेम की बखिया उधेड़ कर रख दी है। शासकीय अनुदान की राशि गौशाला के संचालक स्वयं डकार गये और मूक गौमाताओं को भूखा रख कर मार डाला गया जो सुनियोजित एवं अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। गोरक्षा का स्वांग रचने वाले भाजपा एवं उनके जनप्रतिनिधियों के पास इतना भी समय नहीं था कि वह शगुन गौशाला का निरीक्षण कर लेते । पशुपालन विभाग द्वारा निरीक्षण किया गया होता तो गौशाला के अव्यवस्थित रखरखाव एवं गायों की दयनीय स्थिति की सही जानकारी मिल सकती थी तथा मृत गायों को बचाया जा सकता था । भाजपा सरकार मे ही दुर्गुकोंदल गांव स्थित शासकीय गौशाला में बड़ी संख्या में गायों के अचानक भूख से मरने की दर्दनाक घटना से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
 बताया जा रहा है कि हरीश वर्मा पर गौशाला का प्रबंधन सही तरह से न करने और गायों की देखभाल न करने का लगातार आरोप रहा मगर नेता होने के नाते वह बचता रहा।
गायों की मौत के आंकड़े अबूझ हैं। पशुचिकित्सक दो दिन में 27 गायों का पोस्टमार्टम करने की बात मान रहे हैं।

गायों की कथित रूप से भूख से मौत के बाद गौशाला संचालक हरीश वर्मा के खिलाफ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4 और 6 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 एवं भारतीय दण्ड अधिनियम की धारा 409 के तहत अपराध पंजीकृत किया गया है। 

भाजपा नेता हरीश वर्मा पर आरोप लगा है कि मृत गायों की खाल उतारकर बेच देता था और मांस को मछलियों के चारे के रूप में इस्तेमाल करता था।
छत्तीसगढ़ छात्र संगठन जोगी के अहिवारा ने एक ज्ञापन में कहा है कि संचालक गायों की तस्करी करने, गाय की हड्डियों को टेलकम कंपनी (पाउडर) को बेचने में  लिप्त रहा  है।   ग्रामीणों का कहना  है कि हरीश मृत गायों की खाल उतारकर मछलियों के चारा के रूप में इस्तेमाल करने बेच देता था। मांस गांव के निकट एक तालाब के किनारे मृत गायों को फेंक देता था।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के दुर्ग जिले में एक गोशाला में बड़ी संख्या में गायों की मौत के बाद राज्यभर में गोशालाओं की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने दुर्ग की घटना को गंभीरता से लिया है और गोशाला के संचालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सभी गोशालाओं को शामिल किया जाएगा, चाहे उन्हें राज्य शासन से अनुदान मिलता हो या नहीं। 

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क्यों बौखलाए हैं नक्सली

मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

बस्तर की खूनी धरती पर एक बार फिर जघन्य नक्सली वारदात ने उन रक्तरंजित सवालों को कुरेद दिया है जो इस शांत वादी में लगातार सुलग रहे हैं। नक्सली वारदातों में हाल में आई तेजी के लिए कई कारण गिनाए जा रहे हैं जिसमे पहला कारण स्ट्रैटेजिक है। 
नक्सली कतई नहीं चाहते हैं कि जंगल में उनके महफूज ठिकानो तक सड़के बने। दरअसल बस्तर में अब सडक निर्माण का काम कराना सुरक्षा बलों के जिम्मे है जिसमे रोड ओपनिंग पार्टी के लगातार बढ़ते दबाव की वजह से बस्तर संभाग में नक्सलियों के पैर उखड़ने लगे हैं।
नक्सली बयानों में हमेशा कहा गया है कि 'छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपत्ति व संसाधनों खासकर जल-जंगल-जमीन व खनिज संसाधनों एवं आदिवासी अस्तित्व पर आद्योगिक खतरे हैं। इसलिए सडके नहीं बनने देंगे।' 
वे बुरी तरह बौखला गए हैं...छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, बंगाल और मध्य प्रदेश के नक्सलियों के प्रभाव वाले 44 जिलों में 5,412 किमी सड़क निर्माण परियोजना को मंजूरी दी गई है. निर्माणकार्यों से ये नक्सली खतरा महसूस करते हैं. 
रायपुर से 500 किलोमीटर दूर सुकमा/बस्तर छत्तीसगढ़ का वो इलाका है जहां नक्सली हुकूमत तक सरकार भी नहीं पहुंच पाती है। बड़े पत्तों वाले सालवन से ढंके जंगलों में कई नक्सली ठिकाने हैं।

जाहिर तौर पर 26 जवानों की शहादत खुफिया महकमे की नाकामी मानी जा रही है लेकिन दो महीने में दूसरी बड़ी घटना बताती है कि सीआरपीएफ के ही जवान लगातार शहीद हो रहे हैं तो हैं कही न कही इनपुट ओरिएंटेड कॉर्डिनेशन में कमी है। बस्तर में आम नागरिक सिर कलम किये जाने के भय से खुफिया सूचनाएं देने का साहस नही जुटा पाता और नक्सली भय का माहौल लगातार कायम रखने इस तरह की जघन्य वारदातों को अंजाम देते हैं। यह उनकी रणनीति का हिस्सा है।
जीरम घाटी में नक्सलियों के दुश्मन नंबर एक बस्तर टाईगर के नाम से मशहूर दिलेर महेंद्र कर्मा मार डाले गए थे। 2013 की इस घटना बाद नक्सलियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नही हुई और दुश्मनो को निपटा कर नक्सली अपने मकसद में कामयाब हो गए।
बस्तर का ही सुकमा ,दंतेवाडा व नारायणपुर सबसे ज्यादा तबाह है। नक्सलियों के रास्ते में बाधक जनप्रतिनिधि व आदिवासी नक्सलियों के निशाने पर हैं। लगातार इनकी हत्या और अपहरण की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके पीछे लोकतंत्र को कमजोर करने और दहशत फैला कर अपना वजूद कायम रखने की नक्सली मंशा साफ है। 2015 में मोदी की बस्तर में सभा न होने पाए इस मंशा से बस्तर में काबिज माओवादियों ने एडी चोटी का जोर लगा दिया था . लालगढ़ (पश्चिम बंगाल) में सेना के हाथों बुरी तरह कुचले जाने और आंध्र प्रदेश में ग्रे हाउंड फोर्स से खदेड़े जाने के बाद पश्चिम ओडीसा और दक्षिण छतीसगढ़ नक्सिलयों का अभ्यारण्य बना हुआ है।शबरी नदी के तट पर स्थित सुकमा जिला न केवल बस्तर संभाग बल्कि छत्तीसगढ़ के भी दक्षिण छोर का आखिरी जिला है। इसकी सीमा ओड़िशा और आन्ध्र प्रदेश से लगी हुई है।


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