शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

प्रेस क्लब ,रायपुर में
एक शाम कश्मीर के नाम

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छत्तीसगढ़ में किसकी साख दांव पर

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

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23-4-19
*सहारा समय* एमपी सीजी
Live on voting day

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नामवर होने का मतलब

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

नामवर जी नहीं रहे...यह खबर बिल्कुल ऐसी है जैसे आलोचना जगत का बसंत सहसा पतझड़ में बदल गया हो। हिंदी के शिखर आलोचक नामवर सिंह जी नहीं रहे, यह खबर देर रात आई और उन स्मृतियों का सैलाब भी बह गया जब वे राष्ट्रीय सहारा अखबार के प्रधान संपादक के रूप में दिल्ली में थे।

 उनके साथ कुछ महीने काम करके जो प्रचंड अनुभव हुआ उसने दिमाग दुरुस्त कर दिया था। हिंदी का प्रकांड विद्वान और प्रखर आलोचक संपादक की कुर्सी पर विराजमान हो, वो भी  प्रधान संपादक की कुर्सी पर तो उनकी मैग्नीफाइंग ग्लास जैसी नजरों से छोटी से छोटी गलती भी बच नहीं सकती। मेरा यही अनुभव हुआ जिसकी वजह से मेरे जीवन का पहला अवसर था जिसमें खेद मेरे नाम से बाकायदा अखबार में छपा। 
हुआ यह था कि मैंने खबर तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के निर्वाचन के बाद उनकी जीवनी से संबंधित खबर लिखी थी।

 मैंने लिख दिया था कि वे अन्नामलाई विद्यालय में पढ़े थे जबकि तथ्य यह था कि वह अन्ना विश्वविद्यालय में पढ़े थे। खबर छपने के अगले दिन खबरों पर पैनी नजर रखने वाले आदरणीय ग्रुप एडिटर गोविंद दीक्षित जी का सनसनाता हुआ फोन आ गया। 
"नामवर सिंह जी आपसे बात करना चाहते हैं" 
मैंने पहली बार बात की।
प्रणाम का जवाब मिला फिर सात्विक साहित्यिक फायरिंग। 
होश दुरुस्त। 
नामवर जी ने साफ कहा कि वह अन्नामलाई विश्वविद्यालय नहीं है अन्ना विश्वविद्यालय है।
 मैंने कहा कि साउथ के विश्वविद्यालयों के बारे में सूत्र ने जो सबको जो कुछ बताया वही लिखा है। 
तब गूगल नहीं था। मैंने कामन सूत्र से टेलिफोनिक इनपुट के बाद यह खबर लिख दी थी। 
कई जगह यही छपा भी, मगर नामवर जी ने कहा "नहीं, गलत...मतलब गलत"
 जो रिपोर्टर रोजाना प्रमोद महाजन के कक्ष में बैठ कर राष्ट्रीय राजनीति की अंदरूनी ख़बरें जुटाता था वो एक यूनिवर्सिटी में फंस गया। नामवर जी तो खुद में ही एक यूनिवर्सिटी थे। गलती पर मैंने सूत्र को जी भर कर कोसा। अगले दिन बाकायदा मेरी तरफ से खेद प्रकाश हुआ " अब्दुल कलाम जी अन्ना मलाई नहीं अन्ना विवि में पढ़े थे" 

यह घटना दिमाग दुरुस्त कर गई। क्या फर्क होता है दीगर में और नामवर होने में...   हम लोग खबरें देते हैं, सूत्र कोई हो ज़िम्मेदार रिपोर्टर होता है। 
घटनाक्रम के बाद खबरों के प्रति सजगता और बढ़ी। बात आई गई हो गई। 
फिर हमेशा नामवर सिंह जी से जब भी मुलाकात हुई तो उन्होंने हौसला

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करारी हार, जन प्रहार

रविवार, 16 दिसंबर 2018

 छत्तीसगढ़ में इस बार कमल बुरी तरह मुरझा गया और ऐसा लगता है कि 5 सालों में बीजेपी के खिलाफ जनरोष इस कदर बढ़ा कि लोगों ने बीजेपी के निशान कमल की 50 पंखुड़ियों को नोच कर सिर्फ 15 पंखुड़िया रहने दी हैं।15 बरस में बीजेपी 50 से 15 पर आ गई।

 यह हालात छत्तीसगढ़ में अचानक कैसे बन गए जिसका इक्का-दुक्का सर्वेक्षणों में तो हवाला दिया जा रहा था लेकिन बीजेपी तो छोड़िए कांग्रेस और दीगर दलों को भी यह इलहाम नहीं था कि जनता इस बुरी तर ह डॉक्टर रमन सिंह की बेलगाम ब्यूरोक्रेसी नेता गठबन्धन से आजिज, आतंकित और पीड़ित है। 
 
 मतगणना वाले दिन एक सीनियर बीजेपी लीडर की टिप्पणी थी कि ईवीएम से मतगणना के नतीजे नहीं "लोगों की नफरत निकल रही है!" छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों से सरकार चला रही बीजेपी का काफिला अचानक कैसे लुट गया और राज्य के 13 मंत्रियों में से 8 बुरी तरह कैसे हार गए, इसको लेकर अब सन्निपात की स्थिति से उभरकर मंथन किया जा रहा है। मोटे तौर पर जो कारण रणनीतिकार गिना रहे हैं उनमे किसानों की नाराजगी और बस्तर से लेकर सरगुजा तक बीजेपी के जिम्मेदार मंत्रियों बड़े कार्यकर्ताओं और रसूखदार लोगों का दंभ अहंकार से भरा हुआ बर्ताव बताया जा रहा जिससे सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया रंगे हुए हैं।

बीजेपी के लिए शर्मनाक नतीजा यह रहा है कि 27 जिलों में से बीजेपी 16 जिलों में आउट हो गई जबकि बीजेपी की पूरे राज्य के इतिहास में ऐसी दुर्गति कभी नहीं हुई। 

अब यहां गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस ने बेशक 68 सीटें (90 में से) हासिल जरूर कर ली है लेकिन आंकड़े बताते हैं  कि यह बीजेपी की हार है कांग्रेस की जीत नहीं है क्योंकि कांग्रेस के मत प्रतिशत में सिर्फ 1.53 प्रतिशत वृद्धि ही हुई है। उसे इस 43 प्रतिशत मत मिले हैं जबकि पिछली बार 41% मत मिले थे और बीजेपी सिर्फ 1% से भी कम मतों से 50 सीटें लेकर जीत गई थी। इस बार बीजेपी को 15 सीटों पर संतोष करने की मजबूरी है जो कुल वोट प्रतिशत का 10% इधर उधर हुआ है उसमें 8% जोगी और बसपा का गठबंधन  ले उडा है जिनको 7 सीटें मिली है।

राज्य में पिछले चुनाव की तुलना में एक फीसद कम लोगों ने नोटा का बटन दबाया है। यहां इस बार केवल दो फीसद लोगों ने ही नोटा का उपयोग किया है, जबकि पिछली बार करीब चार लाख वोटरों ने नोटा का बटन दबाया था जो कुल मतदान का करीब तीन फीसद था।

छत्तीसगढ़ में ईवीएम से सिर्फ हार जीत नहीं भीषण जनरोष निकला है। निरंकुश अफसरशाही के खिलाफ। एक नाराज कार्यकर्ता के मुताबिक पूरे कुनबे की आंखों में सत्ता् की चाशनी चढ़ गई थी और अकेले रमन जिम्मेदार नहीं, पूरी पार्टी में अहंकार और एक दूसरे को निपटान वृत्ति पनप गई थी और मीडिया देखने वाले लोग पत्रकारों को सूचना भी देने में पिक एंड चूज करने लगे जिससे मीडिया का भी न्यूट्रल वर्ग खफा हो कर बैंड बजाऊ मोड में आ गया।
एक रमन समर्थक व्यापारी के मुताबिक "रमन सिंह को हमेशा विनम्र और गंभीर पाया। झूठ नहीं बोलना चाहिए। सत्ता वत्ता से अपने को क्या लेनादेना मगर वे जिस चांडाल चौकड़ी से घिर गए थे लोगों ने उनको सबक सिखाया है।"

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मौत सामने खड़ी थी

बुधवार, 31 अक्तूबर 2018


दंतेवाड़ा के हमले में नक्सलियों ने बाल नक्सलियों का भी इस्तेमाल किया। इलाके में 200 से ज्यादा नक्सली थे जिन्होंने जवानों और मीडिया टीम को घेर लिया था।

हमले से जिंदा बच आए जवान विष्णु नेताम ने यह बताया है कि नक्सलियों की टीम में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे जिनकी उम्र 10 - 12 साल रही होगी। इन बच्चों की आड़ लेकर नक्सलियों ने एंबुश लगाकर फायरिंग शुरू कर दी थी। इस हमले में एक मीडियाकर्मी सहित चार जवान शहीद हो चुके हैं। घायल का इलाज रामकृष्ण केयर अस्पताल में जारी है। विष्णु नेताम के बयान के मुताबिक 30 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे हम निकले थे। दूरदर्शन की टीम हमें रास्ते में मिली और फिर वह भी हमारे साथ हो गए मगर रास्ते में नक्सलियों ने चारों ओर से अचानक घेर लिया। 
 "हैंड ग्रेनेड दागे गए एके-47 से गोलियों की बौछार की गई और उसके बाद हम लोग गड्ढे में कूद गए। विष्णु ने बताया मैं दूसरे नंबर पर था। मेरे आगे रुद्र प्रताप सिंह थे जो सब इंस्पेक्टर थे जिन्हें बचने का भी मौका नहीं मिला और उनकी मौत हो गई।"

हमले का वीडियो बना लिया 

दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में ज़िंदा बच गए दूरदर्शन के सहायक कैमरामैन मोर मुकुट शर्मा ने हमले का पूरा वीडियो बना लिया और अब वे मौत के मुंह से बच निकलने के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।
 उनका वीडियो बताता है कि सनसनाती गोलियों की आवाज के बीच के भयानक हालात क्या रहे थे। खौफ का आलम क्या रहा होगा। लाइटमैन ने हमले के दौरान अपना और मौजूद पुलिसकर्मियों का वीडियो बनाया है। वीडियो में अपनी मां को याद कर रहा है और पानी मांग रहा है लेकिन जवानों के पास पानी नहीं था मगर वे बराबर उसे दिलासा देते रहे कि फोर्स आ चुकी हैं। वीडियो में कहा गया कि मम्मी मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं। हो सकता है इस हमले में मैं मारा जाऊं। परिस्थिति सही नहीं है। पता नहीं क्यों? मौत को सामने देखते हुए डर नहीं लग रहा है। बचना मुश्किल है यहां पर। 
कुल1 मिनट 27 सेकेंड के अपने संदेश में कैमरामैन मोर मुकुट ने रिकार्ड किया। चुनाव कवरेज के लिए जाते समय अचानक नक्सलियों ने उन्हें घेर लिया। परिस्थिति सही नहीं है और पता नहीं मैं कब मारा जाऊं। मम्मी मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं। मौत सामने घूम रही है और पता नहीं कि मैं लौटूंगा या नहीं।

गौरतलब है दंतेवाड़ा नीलवाय जा रही दूरदर्शन की टीम पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था। पता चला है कि हमले के दौरान कैमरामैन आगे-आगे चल रहा था जबकि रिपोर्टर और लाइटमैन पीछे थे। गोलीबारी शुरू होते ही दोनों एक गड्ढ़े में गिर गये और पूरी गोलीबारी तक वहीं छुपे रहे जिससे उनकी जानें बच गई। पुलिस कर्मी उनको कवर करके फायरिंग करते रहे।

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सहारा दफ्तर में नक्सली

शुक्रवार, 12 अक्तूबर 2018


छत्तीसगढ़  के जय स्तंभ चौक रायपुर स्थित समय  में बुधवार को एक कथित नक्सली ने पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण किया। खुद को नक्सली बताने वाले विष्णु उर्फ विनोद क्षेत्री ने दावा किया कि वह महासमुंद दलम के लिए सक्रिय रहा है और उसने कहा कि सहारा की विश्वसनीयता की वजह से वह दफ्तर आया और उसे उम्मीद है कि उसके साथ न्याय होगा।
बुधवार को सुबह कोई 10: 30 बजे का समय था। सहारा समय रायपुर के दफ्तर में सामान्य दिनों की तरह काम चल रहा  था। अचानक एक सावला सा आदमी सिर पर टोपी लगाए हुए दफ्तर में घुस आया और आते ही उसने कहा "मुझे किसी जिम्मेदार व्यक्ति से मिलना है" जब उससे मुलाकात की गई और कमरे ने कुर्सी पर बैठ कर जब उसने अपना परिचय दिया तो सभी एकबारगी सकपका ही गए। उसने कहा मैं एक नक्सली हूं और मैं आप के मार्फत आत्मसमर्पण करना चाहता हूं। शुरू में तो लगा यह कोई सिरफिरा हो सकता है मगर उसका हाव-भाव, खास तरह की आक्रामक तेजतर्रारी देखकर समय के प्रदेश प्रभारी दीपक विश्वकर्मा ने सीधे नोएडा मुख्यालय को सूचना दी।  वहां से यह तय हुआ कि इस व्यक्ति का सीधा परिचय " समय" के दर्शकों से कराया जाए और लगे हाथ कानूनी तौर पर पुलिस को इत्तला भी की जाए।
 उस व्यक्ति ने सीधे प्रसारण में बताया कि वो महासमुंद दलम का सदस्य है और सहारा को उसने इसलिए चुना क्योंकि मीडिया में उसका इस ग्रुप पर पूरा भरोसा है। पुलिस के पास इसलिए नहीं जाना चाहता क्योंकि उसे भरोसा नहीं है। उसने उम्मीद जताई कि उसे सरेंडर पॉलिसी का लाभ भी मिलेगा।
 बाद में इत्तला पा कर छत्तीसगढ़ के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच के एसपी डी रवि शंकर दफ्तर में आए और उन्होंने कैमरे के सामने यह भरोसा दिया कि पहले उसकी तस्दीक की जाएगी और उसके बाद तमाम औपचारिकताएं पूरी करके उसे न्याय दिलाया जाएगा।

 नक्सली ने यह बयान दिया कि माओवाद से उसका मोह भंग हो चुका है और वह समाज की मुख्य धारा में आना चाहता है। उसने बताया कि उसके और साथी भी बाद में सरेंडर करेंगे। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है।
गौरतलब है कि बस्तर में नक्सली अब हिंसा से आजिज हैं और लगातार आत्म समर्पण कर रहे हैं। बस्तर में शांति बहाली की दिशा में यह एक शुभ संकेत माना जा रहा है।

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डा रमन सिंह के 14 साल

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017


मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार के लगातार 14 साल पूरे कर गए हैं। इस महीने 12 दिसम्बर को डॉ. सिंह अपनी तीसरी पारी के कार्यकाल के चार वर्ष पूर्ण कर पांचवे वर्ष में प्रवेश करेंगे। विगत 7 दिसंबर को उन्होंने 14 साल का रिकार्ड समय पूरा कर लिया।

लगातार पांच हजार दिन पद पर रहने का रिकार्ड बनाने वाले डा.सिंह इतने लम्बे समय तक सीएम बनने वाले भाजपा शासित राज्य के पहले सीएम हैं।
आज देर सांय चुनिंदा मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में रमन सिंह ने कहा कि अगले साल नवंबर में विधानसभा के चुनाव हैं मगर सरकार पूरे राज्य को विद्युतीकृत करने और ओडीएफ Open Defecation Free (ODF) स्टेट बनाने के लिए कृतसंकल्पित है।

आज उन्होंने अफसरों के बीच कहा कि ग्लोबल ग्लोबल रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Credit Rating Information Services of India Limited) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को नागरिक सेवाओं लिए देश का प्रथम, रोजगार उपलब्ध कराने में द्वितीय, मैन्यूफ्रेचरिंग, व्यापार, परिवहन और संचार सुविधाओं में द्वितीय स्थान दिया है।  14 वर्ष में राज्य में सड़क नेटवर्क और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में भी सफलता मिली है। प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूल तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 21 हजार 600 से बढ़कर 62 हजार तक पहुंच गई है। 
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्य में विपक्ष इसी तरह काम करता रहे तो अगली पारी भी भाजपा की होगी।
उन्होंने राज्य में हाथियों के बढ़ते उत्पात पर कहा पडोसी राज्यों में चारे की समस्या है। इस समस्या से व्यवस्थित ढंग से निपटा जा रहा है।

 तेंदूपत्ता तिहार में भाग लेने के लिए अजित जोगी के गढ़ मरवाही पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि जोगी की पार्टी की चुनौती से इंकार नहीं किया जा सकता। जोगी की पार्टी प्रदेश में तीसरी पार्टी के तौर पर तेजी से उभर रही है। अगले साल होने वाले चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष मानकर चल रहा हूं।

 दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव डॉ. सिंह ने कहा विश्व बैंक, नाबार्ड और जिला खनिज न्यास निधि से सहायता लेकर प्रदेश के भवनविहीन सभी 633 छात्रावास और आश्रम शालाओं के भवनों का निर्माण किया जाएगा। इन भवनों के निर्माण में लगभग ढाई हजार करोड़ रूपए की लागत जाएगी।
   
   


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