पान की दुकान से चमके प्राण

मंगलवार, 16 जुलाई 2013

 मशहूर फिल्म ‍अभिनेता प्राण सिकंद का 93 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बीमारी की वजह से उनका बोलना भी बंद हो गया था लेकिन एक वक्त था जब उनकी रौबदार आवाज से दर्शक थर्रा उठते थे और विलेन का दूसरा नाम हो गया था -प्राण   

...उनके डायलाग आज भी दुहराए जाते है।
"शेरखान ने शादी नहीं की तो क्या हुआ, बारातें तो कई देखी हैं"-
"जंजीर" का यह डायलाग आज भी फेमस है।

उनका जब जंजीर के लिए सेलेक्शन हुआ तब पहला शॉट थाने  का था, जिसमे अमिताभ प्राण की कुरसी पर लात मारते हैं । 


यह शाट हुआ तो प्राण ने प्रकाश मेहरा को कोने में ले जा कर कहा था यह अभिनेता आने वाले समय का स्टार है। प्राण की यह बात सच साबित हुई । 
 प्राण ने 400 फिल्मों में काम किया. पूरब-पश्चिम, कर्ज, शराबी और जंजीर उनकी कुछ यादगार फिल्में हैं।  प्राण किसी समय में फोटोग्राफर बनना चाहते थे।  शहर की रामलीला में सीता का किरदार निभा कर प्राण अभिनय की दुनियामे गए ।  प्राण की पहली  पंजाबी  फिल्म का नाम था यमला जट जो 1940 में आई थी।जंजीर का शेरखान हो या कस्मे वादे प्यार वफा गाता फिल्म उपकार का मलंग।हर किरदार को उन्होंने भरपूर जिया।प्राण की प्रमुख फिल्मों में 'छलिया', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'कश्मीर की कली', 'दो बदन', 'जानी मेरा नाम', 'गुड्डी', 'परिचय', 'विक्टोरिया नंबर 203', 'बाबी', 'अमर अकबर एंथनी', 'डान', 'शराबी' आदि शामिल हैं.
प्राण साल 1998 में ही फिल्‍मों से रिटायर हो चुके हैं. उनको 2001 में 'पद्मभूषण' से सम्‍मानित किया जा चुका है.स्टारडस्ट उन्हें विलेन ऑफ द मिलेनियम के खिताब से भी सम्मानित कर चुका है।
प्राण को प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया था-मौत से चंद दिन पहले।
    
अमिताभ उस समय नए थे और प्राण एक स्थापित कलाकार थे। प्राण और अमिताभ ने 14 फिल्मों में साथ काम किया। इसमें 'मजबूर', 'अमर अकबर एंथनी', 'डॉन', 'शराबी' और 'कालिया' प्रमुख थीं।

1938 में लाहौर की एक  पान की दुकान पर खडे प्राण की मुलाक़ात जिस शख्स से हुई उसने उनकी किस्मत चमका दी। प्रसिद्ध लेखक वली मुहम्मद वली  पान खाने उसी दूकान पर पहुंचे.वे एक पंजाबी फिल्म में खलनायक की भूमिका के लिए ऐसे ही नौजवान की तलाश में थे. वली ने फिल्म में काम करने का प्रस्ताव रखा. 
प्राण ने इसे गंभीरता से न लेते हुए, वली साहिब से पूछा- ‘क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?’
 वली साहिब ने कहा- ‘वली’.
 प्राण ने हँसते हुए कहा-  ‘आधी रात को कुछ घूँट लेने के बाद हर कोई खुद को वली समझाने लगता है’।
 तीन-चार दिनों के बाद   एक अंग्रेजी फिल्म के शो में वली साहिब से फिर टकरा गए . 
वली साहिब ने पूछा- ‘क्या हुआ? तुम आये क्यों नहीं?’ 
अब प्राण को उस पेशकश की गंभीरता का एहसास हुआ. अगले ही दिन वे स्टूडियो गए  और 50 रुपए मासिक पर पंजाबी फिल्म ‘यमला जाट’ में खलनायक की भूमिका के लिए रख लिए गए  इस तरह प्राण कृश्न सिकंद का सफ़र शुरू हुआ।   प्राण की आखिरी फिल्म- तुम जियो हजार साल, 2002 थी|

1 comments:

कविता रावत 9 अक्तूबर 2013 को 11:12 am  

प्राण जैसा नाम वैसे ही जीवंत कलाकार थे ..आपने उनके बारे में बहुत बढ़िया जानकारी साझी की ..आपका आभार ..

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