इस बार भी अहम् मुद्दा है चावल

रविवार, 17 नवंबर 2013

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम दौर के लिए प्रचार थम चुका और प्रचार का एक पूरा महीना 19 november को होने वाले मतदान के बाद शांत होगा.. इस माहौल में आकलन हो रहा है कि इस बार किन मुद्दों पर जनमानस का ध्रुवीकरण हो रहा है और इसके बीच यह साफ़ नजर आ रहा है कि पिछले दो चुनावों में जिस चावल मुद्दे ने सरकार बनवाई या हटवाई थी वही चावल इस बार भी प्रचार की हंडिया में पक रहा है और इस बार भी चावल असर दिखाएगा।

चुनाव में मुद्दे तो कई उठे मगर अंत में बात चावल पे टिक गई  और राज्य की चुनावी सियासत अब भी चावल के इर्द-गिर्द ही घूम रही है.
कांग्रेस ने भाजपा का हिट हुआ यह यह मुद्दा लपकना चाहा और सबसे पहले  घोषणा -पत्र पेश कर वायदा किया गया कि यदि उसकी सरकार आती है तो वह ना केवल गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को, बल्कि मध्यम वर्ग को भी मुफ्त 35 किलो चावल हर माह देगी. वहीं किसानों को धान खरीदी पर प्रति क्विंटल 2,000 रुपए का भुगतान करने की भी घोषणा की गई है. 

इसके बाद मुखयमंत्री डॉ. रमनसिंह व भाजपा घोषणा पत्र समिति के संयोजक एवं लोक निर्माण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने चुनाव घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार आने पर राज्य में अब गरीबों को दो रुपए की जगह एक रुपए किलो में चावल दिया जाएगा.
अपने मुद्दे को झटके जाने से परेशान रमन सिंह ने मंच से यह कह कर एक नया शिगूफा छेड़ा कि लोग इतने बेगैरत नही हैं कि मुफ्त में चावल लें।  उन्होंने कांग्रेस के मुफ्त चावल की घोषणा को राज्य के स्वाभिमान से जोड़ दिया।
हालाकि बीते वर्षों में साफ़ नजर आया कि गरीबों को एक रूपये किलो चावल की लोक लुभावन योजना के सहारे दुबारा राज्य में सरकार गठित करने में सफल हुई भाजपा का गाँव में तो दबदबा कायम रहा मगर शहरों के पढ़े लिखे मतदाताओं  के एक बड़े वर्ग के लिए सफाई, पेयजल समेत बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे अहम् रहे  जिस पर लोगों की नाराजगी भारी पडी और राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर और राजनांदगाँव जैसे बड़े शहरों के महापौर पद कांग्रेस ने भाजपा से झटक लिए. नवम्बर 2003 में डा. रमन  ने सस्ता चावल देने की अपनी योजना के सहारे दुबारा राज्य में भाजपा की सरकार बनाने में सफलता हासिल की थी.  बीते चुनाव में 2008 में रमन ने ३ रूपये किलो चावल का वायदा किया तो कांग्रेस ने यह मुद्दा लपकते हुए २ रूपये किलो का वायदा कर दिया मगर रमन का चावल कार्ड सफल हुआ।  इस बार डा. रमन  सिंह ने एक रूपये किलो चावल का मुद्दा उछाल दिया तो कांग्रेस मुफ्त देने पर उतर आई।    चुनाव में भाजपा की जीत में चावल के अहम् रोल को देखते हुए
पार्टियों ने भी अपने राष्ट्रीय एजेंडे में शामिल किया है.
बस्तर में बड़े संयंत्र लगाने का नक्सली संगठन विरोध कर रहे हैं और जो मौजूदा कारखाने हैं उनके कारण शहरों में ही नहीं गावों में भी प्रदूषण फैलने से विपक्षी ही नहीं सत्तारूढ़ भाजपा से भी प्रदूषण के खिलाफ तीखी आवाजें सुनाई पड़ रही हैं. हालाकि यह नगण्य मुद्दे हैं और जो मुद्दे हो सकते थे उन पर बड़े नेताओं के आरोप प्रत्यारोप की भाषणबाजी ने पानी फेर दिया।

19 नवम्बर को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के होने वाले मतदान में राज्य के नौ मंत्रियों, विपक्ष के नेता और विधानसभा अध्यक्ष की चुनावी किस्मत दांव पर है।
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Ramesh Sharma

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