अनिल अग्रवाल को गुस्सा क्यों आता है

रविवार, 9 नवंबर 2014


छत्तीसगढ़ मे दो बड़े उद्यमी हैं। बालको वेदांता और जिंदल  समूह। इनमे एक प्रमुख एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी बालको -वेदांता समूह के चेयरमेन अनिल अग्रवाल राज्य में अफसरशाही के रवैये से नाराज हैं।
उन्होंने राज्य में निवेश से तौबा करने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि राज्य में निवेश किया है तो झुककर रहना उनकी मजबूरी है।  उन्होंने कहा कि राज्य में बहू बनकर निवेश करने आए थे और बहू बनकर ही रहना होगा इसका उनको एहसास है।    वेदांता समूह ने 2002 में भारत एल्यूमिनियम कम्पनी लिमिटेड (बालको) में विनिवेश कर राज्य में  अग्रणी मुकाम पाया है मगर अचानक बदले समीकरणों को अफसरशाही के रवैये से जोड़ कर देखा जा रहा है।
मुलाक़ात में अग्रवाल ने कहा कि बालको में 1200 मेगावाट का बिजली संयंत्र दो वर्षों से बनकर तैयार है पर वह शुरू नहीं हो पा रहा है। वह इसके लिए किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं पर इसको वह राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण जरूर मानते हैं.
उन्हें राज्य के गठन के चार पांच वर्ष तक ऐसा लग रहा था कि छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य ही नहीं बनेगा बल्कि औद्योगिक निवेश के लिए भी सबसे बेहतर वातावरण यहां होगा पर ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एक तरफ यहां अच्छा वातावरण नहीं है दूसरी ओर अच्छे वातावरण के कारण ही गुजरात ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश भी काफी आगे निकल गया है।  राज्य में अपार खनिज सम्पदा है जिसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
अग्रवाल ने साफ़ लफ्जों में कहा कि राज्य सरकार के रुख के कारण विनिवेश के बाद लगातार फायदे में चलने वाले बालको को घाटा हो रहा है।  वह यहां पर 15 हजार करोड़ रुपए निवेश का एक एल्मुना प्लांट लगाना चाहते हैं अगर सहयोग नहीं मिला तो मध्यप्रदेश जाने पर विचार करना पड़ेगा। अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की उद्योगो के प्रति उदासीनता है।  उन्होंने कहा कि उनके बिजली संयंत्र को क्यों मंजूरी नहीं दी जा रही है इसका उन्हें पता ही नहीं है। क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 'मेक इन इंडिया' के दिए गए नारे का असर भाजपा शासित राज्यों तक नहीं पहुंचा है, इस सवाल के जवाब में अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का रुख काफी साकारात्मक है पर राज्यों के बारे में वह कुछ नहीं कहेंगे।
अग्रवाल ने अपने प्रवास में विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस.सिंहदेव से भी मुलाकात की । इस मुलाकात पर कयास शुरू हो गए है।
 अडंगाशाही का परिणाम है कि वेदांत का कैंसर अस्पताल  अधर  में लटका है जिसे कायदे से तीन साल पहले बन जाना था मगर अब तक बना क्या है और प्रस्तावित प्लान स्थिति क्या है चित्र में देखें और राज्य के विकास में अड़ंगों पर पर माथा पीटें।

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