बस्तर में शाह और मात का खेल

सोमवार, 30 नवंबर 2009



छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर में पुलिस ने सघन रूप से नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन ग्रीन हंट चला रखा है लेकिन लगातार शिकस्त के बावजूद नक्सलियों के हौसले पस्त नहीं हैं बल्कि वे अब गुरिल्ला तौर तरीकों से पुलिस बल को परेशान करने में जुट गए हैं और इसी रणनीति के तहत नक्सली जंगल में आने वाले पुलिस दस्तों की सुविधा के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं और ताबड़तोड़ ढंग से रसद मदद के सारे रास्तों को बंद करने में जुट गए हैं |

कुछ दिन पहले रायगढ़ के आगे कोलकाता लाइन एक यात्री ट्रेन पत्री से उतार दी गयी | दरअसल निशाने पर सुरक्षा बालों को ला रही एक दूसरी ट्रेन थी|
बस्तर में एक प्रकार से पुलिस बल और नक्सलियों के बीच लुकाछिपी का खेल चल रहा है| पुलिस बल ने कोदेनार के जंगल में छापा मार कर नक्सली शिविर से 1.6 टन बारूद बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की जबकि गढ़चिरोली इलाके में नक्सलियों ने एक बांस डिपो को फूंक दिया | यह बांस डिपो वन विभाग का था जिसको ले कर नक्सली संदेह कर रहे थे कि इस बांस से सुरक्षा बालों के लिए आधार शिविर स्थापित किये जाएंगे | सुरक्षा बल जंगल में ठिकाना नहीं बना सकें यह सोच कर नक्सलियों ने बांस डिपो को ही जला डाला| हजारों बांस जल कर राख हो गए| अंतागढ़ इलाके में नक्सलियों ने बिजली के ट्रांसफार्मर जला दिए | बिजली विभाग ने हाल में आधार शिविर के लिए 66 के वी का ट्रांसफार्मर लगाया था| कुछ खम्बे भी गाड़े गए थे| नक्सलियों ने समूह में पंहुच कर खम्बे उखाड़ दिए और ट्रांसफार्मर को आग के हवाले कर दिया |
आसपास के गांवों में नक्सली पर्चे फेंक कर दहशत का माहौल बना रहे हैं और धमतरी जिले से यह शिकायत भी आई है कि प्रत्येक परिवार से एक युवक की मांग की जा रही है| कुछ गांवों में शिकायत की गयी है कि युवकों को जबरन उठा लिया गया है|
पिछले कुछ महीनो से सुरक्षा बालों के बढ़ते दबाव के बावजूद नक्सली जंगल के भीतरी ठिकानों में एक प्रकार से मोर्चा ले कर डटे हुए हैं जिससे पुलिस बल भी भोंचक है| कुछ नक्सलियों के कब्जे से अत्याधुनिक किस्म के चीन निर्मित हथियार भी बरामद हुए हैं| नक्सली पुलिस से लुका छिपी का भी खेल खेल रहे हैं | पुलिस जब उनके पीछे एक जिले में जाती है तो वे जंगली रास्तों से दूसरे जिले में चले जाते हैं| उन्होंने पुलिस के छीने हुए वायरलेस सेटों का इस्तेमाल भी इस लुका छिपी के लिए करना शुरू कर दिया है| दरअसल पुलिस के लिए जंगल में मूव करना आसान नहीं है जबकि नक्सली जंगल के चप्पे चप्पे से वाकिफ हैं | इस बार आपरेशन ग्रीन हंट में राज्य की पुलिस का साथ देने के लिए अर्ध सैन्य बालों के जवान जंगल की ख़ाक छान रहे हैं| उनका साथ मिल जाने से राज्य पुलिस के जवानो के हौसले भी बुलंद हैं| इस बीच लगातार मानवाधिकार संगठनो से मिल रही आलोचना को देखते हुए राज्य पुलिस के महानिदेशक विश्व रंजन ने एलान किया है कि हमारे जवान किसी भी सूरत में पहले गोली नहीं चलाएंगे मगर गोली का जवाब गोली से ही दिया जाएगा|
अबूझमाड़ में पुलिस ने दबिश दे दी तो इसे नक्सलियों उनके खिलाफ उसकी एक बड़ी सफलता कहा जाएगा| राज्य पुलिस ने यह भी साफ़ कर दिया है कि अभी जो आपरेशन ग्रीन हंट चलाया जा रहा है वह छत्तीसगढ़ की पुलिस ही चला रही है| केंद्र सरकार का संयुक्त आपरेशन अभी शुरू नहीं हुआ है| बाहर से आ रहे जवानो को अभी सम्बंधित मोर्चो पर रवाना किया जा रहा है| इस आपरेशन की तैयारियां जोरों पर हैं और उधर नक्सली भी झुकने के लिए तत्पर नजर नहीं आ रहे हैं|
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4 comments:

shailendra 30 नवंबर 2009 को 8:55 am  

नक्सलियों के खिलाफ जो लड़ाई लड़ने की तैयारी की जा रही है उसका नतीजा तय है और वो है सरकार की हार ...यदि नक्सलियों को हराना है तो पहले लोगों का दिल जीतना होगा

राजीव रंजन प्रसाद 1 दिसंबर 2009 को 12:38 am  

सरकार देर में जागी है; इस आतंकवाद के अंत के लिये उसे और संगठित हो कर मुहिम चलानी चाहिये।

राजेश अग्रवाल 1 दिसंबर 2009 को 4:22 am  

रमेश जी,
काफी दिनों के बाद आपके ब्लाग पर पहुंच सका. छत्तीसगढ़ पर इस समय गंभीर संकट है. आदिवासियों की दशा नक्सल प्रभावित इलाकों में बहुत गंभीर है. अपने आलेख में आपने इस बात को बखूबी उकेरा है. रचनाशीलता बनाए रखें. शुभकामनाएं.
सादर
राजेश अग्रवाल

surendrahanspa; 13 दिसंबर 2009 को 6:50 pm  

प्रिय रमेश आप का ब्लॉग देख रहा हु अच्छा लग रहा है ऐसे ही लिखते रहे और हम पढ़ते रहे शुभकामनाये
सुरेन्द्र हंसपाल

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