ह्त्या नक्सलियों ने की या हीरा खदान माफिया ने

शनिवार, 5 दिसंबर 2009

छत्तीसगढ़ के हीरा खदान क्षेत्र में पिछले शनिवार की रात वन विभाग के अधिकारी की ह्त्या नक्सलियों ने की थी अथवा वे इलाके में काबिज अवैध खनन माफिया का शिकार बन गए ? यह सवाल पिछले कई दिनों से इलाके चल रही अवैध हीरा उत्खनन की वारदातों की पृष्ठभूमि में कौंध रहा है| मारे गए वनपाल मार्क तांडी को शनिवार को रात में झांसा दे कर गरियाबंद-देवभोग के जंगल में बुलाया गया था| वे बिना पुलिस सुरक्षा के चार वनकर्मियों को लेकर जंगल में चले गए थे| सूचना किसी गाँववाले से आई थी कि जंगल में अवैध कटाई चल रही है| इसकी पुष्टि और रोकथाम के लिए 48 वर्षीय तांडी इन्दागाँव के समीप जंगल में प्रवेश कर गए लेकिन वे जिंदा नहीं लौट सके|
इस घटना ने जंगलों में ड्यूटी करने वाले आम अफसरों, कर्मचारियों समेत पुलिस महकमे के मैदानी दस्तों की सुरक्षा की असलियत बयान कर दी है| गरियाबंद इलाका दरअसल सरकार से ज्यादा जंगल के उस माफिया की नजर में चढ़ रहा है जिसे मालूम है कि इलाके में ज़रा सी खुदाई करने पर असली हीरे के खनिज स्रोत निकल आते हैं| लोग रातों में इलाके में सारी रात खुदाई करते रहते हैं यह इलाके का बच्चा - बच्चा जानता है| इलाके में नक्सलियों की पकड़ भी बढ़ रही है| इस बाबत भी कई घटनाओं से प्रमाण मिलता रहा| मसलन इसी साल कांकेर की पुलिस फ़ोर्स के 13 जवान जंगल में नक्सली हमले में तब मारे गए जब झांसा दे कर उनको जंगल में बुलाया गया था| गरियाबंद इलाका रायपुर और धमतरी के समीप है| बस्तर में लाल झंडा गाड़ने के बाद नक्सली इस इलाके में लगातार दबिश दे रहे थे| पिछले साल उनका एक बड़ा नेता गोपन्ना यहाँ से पकड़ा गया था| गोपन्ना को पकड़ने के बाद नक्सलियों ने खूब कोहराम मचाया| पुलिस विभाग को भी गोपनीय इत्तला मिल रही थी कि नक्सली यहाँ लोकल आपरेशन स्क्वाड बनाने की तैयारियों में जुटे हैं| इलाके में पुलिसकर्मियों की संख्या दुगुनी करने के अलावा इसे नया पुलिस जिला बनाने की पहल पूरी हो पाती इससे पहले नक्सलियों ने वन विभाग के अफसर की ह्त्या करके पूरे महकमे के कर्मचारियों में दहशत भर दी है| इलाके में सक्रिय नक्सलियों ने 22 नवम्बर को वन विभाग का नियंत्रण कक्ष भी आग के हवाले कर दिया था| पिछले दिनों बोरई[गरियाबंद] इलाके का एक वन अधिकारी जंगल में कुछ सशस्त्र लोगों द्वारा धर लिया गया था मगर शुक्र रहा कि उन लोगों ने उसके रूपये और मोबाईल छीन कर उसे ज़िंदा वापस जंगल से खदेड़ दिया |
दरअसल यह जांच का मसला है कि इलाके में जो सशस्त्र लोग सक्रिय हैं वे कौन हैं और उन्होंने वन विभाग के अफसर को क्यों निशाना बनाया ? इलाके में नक्सली सक्रिय हैं यह पुलिस के अधिकारी भी मान रहे हैं लेकिन अब तक देखा गया है कि नक्सली झांसा दे कर पुलिस पार्टी को निशाना बनाते रहे हैं, किसी साधारण अफसर को जंगल में बुला कर मारने की संभवतः यह पहली घटना है| गोली से नहीं वरन लाठी अथवा बन्दूक के कुंदे जैसी चीज से मार डालने की घटना नक्सलियों की प्रचलित ह्त्या शैली से मेल नहीं खा रही है| जिन लोगों ने वनपाल की ह्त्या की, उन्होंने उनके साथ आए चार कर्मचारियों को जाने दिया| इलाके में रात में खुदाई करने वालों में आसपास के ग्रामीण और दूर-दूर से आए हीरा व्यापारी भी शामिल हैं जो किम्बर्लाईट और कोरेंडम का अवैध उत्खनन करा रहे हैं| इलाके में जुलाई में सुरक्षा दस्ते को हटा लिया गया था जिसे लेकर वन विभाग के आला अधिकारी नाराजगी भी जता चुके हैं| देवभोग में हीरे की खदानों में सरकारी स्तर पर पूर्वेक्षण का काम चल रहा है और सरकार अगले दोतीन वर्षों में यहाँ खुदाई की योजना पर काम कर रही है| हीरे का कारोबार करने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी डी बियर्स की सहयोगी इकाई डायमंड ट्रेडिंग कंपनी (डीटीसी) के मुताबिक दुनिया के 90 फीसदी हीरों के तराशने का काम भारत में होता है, ऐसे में यहाँ हीरा उद्योग के फलने-फूलने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं लेकिन एक बड़ा खनन माफिया अभी से खुदाई में भिड गया है जिसे रोकने का काम वन विभाग के अमले के लिए कितना जोखिम भरा है यह शनिवार को हुई घटना में सामने आ गया है|

2 comments:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari 5 दिसंबर 2009 को 8:37 pm  

रमेश भईया यह विमर्श छत्‍तीसगढ की जनता के बीच भी आनी थी किन्‍तु पता नहीं क्‍यूं मीडिया नें इस आशंका पर एक शव्‍द भी नहीं लिखा जबकि यह परिस्थितियों के अनुसार स्‍पष्‍टत: परिलक्षित सत्‍य प्रतीत होता है.
आभार आपका.

गिरीश पंकज 7 दिसंबर 2009 को 3:19 am  

achchha lekh.. badhai...lage raho patrkarita k munna bhai...

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