जाना था जापान पहुँच गए चीन,अब जाईए जेल

बुधवार, 9 दिसंबर 2009



छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग में अस्पताल में काम आने वाली मशीनें जापान से मंगाने की बजाय अफसरों ने फर्जीवाड़ा करके चीन से मंगा ली और सरकार को करोड़े रुपयों का चूना लगा दिया गया लेकिन अब इस फर्जीवाड़े में बुरी तरह फंसे अफसर गिरफ्तारी से बचते फिर रहे हैं| राज्य शासन ने इस मामले में अदालत का सख्त रवैया देखते हुए एक बड़े अफसर की वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए हैं और सारा मामला पुलिस जांच के लिए सौंप दिया गया है|

रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में मरीजों की जांच के लिए कलर डोपलर मशीन खरीदने का मामला इसी साल तब चर्चा में आया जब खरीदी गयी मशीनों ने काम करना बंद कर दिया जबकि इनको खरीदे हुए बमुश्किल एक साल भी पूरा नहीं हुआ था| हल्ला मचा तो जांच शुरू हुई जिसमे पाया गया कि स्वास्थ्य विभाग ने चेन्नई की एक कम्पनी टीवीट्रान को इस मशीन की बड़ी खेप के लिए ठेका दिया था| टीवीट्रान के कर्ताधर्ताओं ने धमतरी की एक लोकल कंपनी छत्तीसगढ़ सर्जिकल को अपने साथ जोड़ लिया लेकिन यहाँ खेल शुरू हो गया | छत्तीसगढ़ सर्जिकल के लोग स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से मिल गए और एक फर्जी टीवीट्रान कंपनी के जरिये सारी खरीद प्रक्रिया शुरू हो गयी| निविदा में शर्त थी की कलर डाप्लर मशीन और मल्टी पैरामीटर जैसे उपकरण जापान से मांगा कर आपूर्ति किये जाएंगे मगर आपूर्तिकर्ता ने यह उपकरण चीन से मंगा कर अस्पतालों में रखवा दिए | यह उपकरण सभी अस्पतालों में कबाड़ का हिस्सा बनने लगे तो सारा भांडा फूटा और यह भी उजागर हुआ कि सारा गोरखधंधा वरिष्ठ अफसरों और शातिर कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ है| धमतरी के आपूर्तिकर्ता के बारे में असली टीवीट्रान के संचालकों ने मामला दर्ज कराया| साल भर से जांच चल रही थी जिसको हर स्तर पर प्रभावित करने की कोशिशों पर न्यायालय की सख्ती ने पलीता लगा दिया | सरकार में भी उच्च स्तर पर साफ़ कर दिया गया कि भ्रष्ट अफसरों को कतई नहीं बख्शा जाएगा| अब नौबत है कि स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी को जेल भेज दिया गया है और एक शीर्ष अधिकारी फरार चलरहे हैं जबकि एक अन्य अधिकारी को जमानत याचिका वापस लेनी पडी है|

राज्य शासन ने स्वास्थ्य विभाग के संचालक और इस मामले में आरोपी डा. प्रमोद सिंह के खिलाफ कडा रुख अपनाते हुए उनकी वेतन वृद्धि रोकने के आदेश दिए हैं| बताया गया है कि फिलहाल लापता हैं| उनकी जमानत अर्जी अदालत से खारिज हो चुकी है| विभाग में वे 7 नवम्बर से छुट्टी पर चल रहे हैं जबकि निचली अदालत ने कल इस मामले में एक अन्य स्वास्थ्य संचालक डा. सार्वा को न्यायिक हिरासत में 17 दिसंबर तक के लिए जेल भेजने का आदेश दिया है| जेल भेजे गए सार्वा स्वास्थ्य आधार पर जेल जाने से बच रहे थे लेकिन सत्र न्यायाधीश एन के चन्द्रवंशी ने कडा रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि उनकी जांच जेल के डाक्टरों से कराई जाए और स्वास्थ्य की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए| एक अन्य आरोपी स्वास्थ्य संचालक डा डी के सेन फिलहाल जमानत पर हैं जबकि कई डाक्टर और अस्पताल के कुछ लिपिक स्तर के कर्मचारी जेल भेज दिए गए हैं|

1 comments:

aarya 9 दिसंबर 2009 को 8:21 am  

भाई जी
सादर वन्दे!
टिप्पड़ी का शीर्षक ही गजब का है.

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