रूतबा, दौलत और ज़िल्लत

सोमवार, 8 फ़रवरी 2010


छत्तीसगढ़ में आजकल देशव्यापी सुर्खियाँ बटोर रहे आई ए एस अफसर बाबूलाल अग्रवाल के कथित कारनामों ने सरकारी सेवा को शर्मसार और कम उम्र में हासिल की गई ढेरों उपलब्धियों से भरे कैरियर को एक झटके में दागदार कर दिया है|अफसरी का जो रूतबा था वो जिल्लत के ऐसे मुकाम पर है जहां सिर्फ बदनामी हाथ में है| बाकी सब आयकर वाले बटोर ले गए और कभी बिना पर्ची दिए उनके कमरे में पहुँच नहीं पाने वाले मीडिया ने अग्रवाल साहब की इज्जत का बिना इजाजत लिए बैंड बजा दिया है|इधर राज्य सरकार ने भी शुरुआती असमंजस के बाद आखिरकार अग्रवाल को निलंबित कर दिया है|
अब तक लाकर,पेट्रोल पम्प,फिक्स डिपोजिट,बीमा कंपनियों में बेहिसाब निवेश के दस्तावेजों समेत ज्वेलरी और नकद राशि की बरामदगी हो चुकी है|
जब वे स्वास्थ्य सचिव थे तो विभाग में इतने घोटाले हुए कि अब अनेक एजेंसियां इनकी जांच में लगी हुई है और निचले स्तर के कई स्वास्थ्य अधिकारी जेल भेजे जा चुके हैं|यह घोटाले उनने उजागर किये या उनकी सरपरस्ती में हुए यह जांच में पता चलेगा|

छापे में घरेलू नौकर, नौकरानी, चपरासी और गाँव में सेवारत मजदूरों के नाम पर करोड़ों रुपयों के बेनामी निवेश का पता चला है|नौकरानी लीना साहू के नाम पर जमा रखे गए पांच हजार अमरीकी डालर बरामद हुए हैं| आयकर अफसरों ने तिल्दा के पास गाँव जा कर पूछताछ की तो मजदूरों ने इस बात पर हैरानी जताई कि उनके नाम पर बैंक में कोई खाता भी है|तस्दीक के लिए आयकर अफसर खरोरा और तिल्दा गए थे जहां कुछ तो छोटे-मोटी दुकान चलाते हैं और उनको ऐसे किसी उनके खाते की भी जानकारी नहीं है|
अग्रवाल का बयान है कि उनके खिलाफ एक षड्यंत्र के तहत कार्रवाई की गई है और घर से जो भी मिला है वह वैध है|
उनने कहा कि "मैंने अपने कार्यकाल में बहुत से गलत लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और मैंने बहुत से लोगों को अपना दुश्मन बना लिया था इस वजह से मेरी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है| लेकिन मैं आगे भी गलत नहीं होने दूंगा चाहे जो हो| मेरे घर से मात्र छः लाख रूपये नकद मिले हैं और मेरे पास जो भी जानकारियाँ हैं वह आयकर विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध करा दी गई है| मेरे २२ वर्षों के कैरियर में मेरा कार्यकाल बेदाग़ रहा है|"
उनका यह भी कहना है कि अगर मैंने कोई भी काम गलत किया है तो उसकी सजा भुगतने के लिए तैयार हूँ| अब इस मामले में अग्रवाल दोषी हैं या बेदाग़ हैं, यह अदालती और विभागीय प्रक्रिया से तय होगा जो यकीन मानिए बहुत लम्बी चलेगी| इस देश में अपराधी को भी जब तक दोष सिद्ध ना हो जाए तब तक सिर्फ आरोपी माना जाता है| हो सकता है वे बेदाग़ भी साबित हो जाएं लेकिन जो मूल सवाल है वो अपनी जगह कायम है कि किसी की धन कमाने की लिप्सा का अंत क्या है| मुझे परवेज मुशर्रफ की जीवनी का एक अंश याद आ रहा है| उन्होंने अपने देश पाकिस्तान के सन्दर्भ में लिखा है कि भ्रष्टाचार के मामले में व्यापारियों को तो दोषी ठहराया जा सकता है क्योंकि वे बैंकों में कागजों की चैन बना कर रखते हैं मगर नेता और अफसर ऐसा कोई सबूत नहीं छोड़ते हैं|
मुझे ये पंक्तियाँ भी याद आ रही हैं कि सांई इतना दीजिए जामे कुटुंब समाए\\ मैं भी भूखा ना रहूँ साधू न भूखा जाए\\
किसी को भ्रष्ट बताने का काम मीडिया का नहीं है और मैं तो इस मत के पक्ष में हूँ कि दोष सिद्ध हुए बिना किसी का मीडिया ट्रायल भी नहीं होना चाहिए मगर देखा यह जा रहा है कि धन की लिप्सा किस हद तक जा चुकी है कि एक लाकर से काम नहीं चलता अब, छह-छह लाकर रखे जाते हैं और एक दिन ऐसा आता है कि दौलत की यह हवस अच्छे भले होनहार कैरियर को भयानक लाकर में बंद करा देती है|

5 comments:

श्याम कोरी 'उदय' 9 फ़रवरी 2010 को 9:05 am  
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श्याम कोरी 'उदय' 10 फ़रवरी 2010 को 5:28 am  
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श्याम कोरी 'उदय' 10 फ़रवरी 2010 को 5:36 am  
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श्याम कोरी 'उदय' 10 फ़रवरी 2010 को 6:59 am  

...इस देश में अपराधी को भी जब तक दोष सिद्ध ना हो जाए तब तक सिर्फ आरोपी माना जाता है| हो सकता है वे बेदाग़ भी साबित हो जाएं लेकिन जो मूल सवाल है वो अपनी जगह कायम है कि किसी की धन कमाने की लिप्सा का अंत क्या है....
...बिलकुल सच कहा,प्रभावशाली अभिव्यक्ति !!!

राजेश अग्रवाल 17 फ़रवरी 2010 को 1:28 am  

राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ और झारखंड में अफसर नेता तो खूब फले फूले पर आम आदमी अब भी नई सुबह की तलाश कर रहा है. सटीक लेख के लिए बधाई

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