पहले गोद मिली अब फिर यतीम

सोमवार, 8 मार्च 2010


रायपुर की ख़बरों में जो दिलचस्पी रखते हैं उनके लिए पिछले हफ्ते एक सनसनीखेज खबर आई| एक शख्स अनाथालय की आड़ में इस मासूम बच्ची कविता का सौदा करते हुए रंगे हाथ कैमरे पर धर लिया गया|यह मासूम बच्ची अब आंबेडकर अस्पताल में भर्ती है और अपने अनिश्चित भविष्य के बारे में भी कुछ नहीं जानती है| उसकी उम्र महज एक महीना है| महिला दिवस पर भी उसकी सुध किसी ने नहीं ली|
जो शख्स धरा गया है उसे कोर्ट ने जेल भेज दिया है और अब पुलिस और अंततः कोर्ट को ही उस शख्स की बेगुनाही को साबित करना है| अब इस मामले का दूसरा पहलू यह है कि उस शख्स ने जो अनाथालय चला रखा है उसमें पलने वाले 50 बच्चे एक बार फिर नियति के हाथों मजबूर हो गए हैं| उनको पालने वाला शख्स तो जेल में है| सवाल है उठ रहे हैं कि बच्चों का क्या कसूर था जो वे एक बार फिर नियति के हाथों छले गए हैं| ज्यादातर वे बच्चे हैं जिनके परिजन नक्सलियों के हाथों मारे गए हैं|
अहम् सवाल उस मासूम बच्ची का है जो अब कोर्ट के रहमोकरम पर है जिसे कौन गोद लेगा और कब लेगा, इसका फैसला जल्द होने की उम्मीद वे लोग लगाए हुए हैं जो बच्ची को गोद लेना चाहते हैं|
नारायण राव नाम है उस शख्स का जो बचपन का सौदा करने में धरा गया है|उसकी पूरी करतूत कैमरे के जरिये उजागर की गई| रायपुर के नंदन वन इलाके में गुरुकुल बाल आश्रम नाम से अनाथालय चला रहे नारायण राव की इलाके में समाजसेवक के रूप में अच्छी धाक है|
दरअसल इस धंधे के सूत्र बहुत दूर तक फैले हैं|अकेले छत्तीसगढ़ में रायगढ़ और जशपुर समेत कुनकुरी-कांसाबेल इलाकों में आदिवासी लड़कियों के गायब होने के मामले पुलिस में दर्ज हो चुके हैं| इस मुद्दे पर विधान सभा में भी खासी गूँज हो चुकी है| इस धंधे के दलाल अस्पतालों और नर्सिंग होम के कर्मियों के संपर्क में रहते हैं और वहाँ से बच्चे सप्लाई किये जाते हैं| इसमें लड़कियों की तादाद ज्यादा होती है जिनको उनके अभिभावक छोड़ जाते हैं या कुंवारी माताएं लोकलाज से नर्सिंग होम में ही रख जाती हैं| राज्य का महिला और बाल विकास विभाग बाल आश्रम और अनाथालय चलाने की मंजूरी तो देता है मगर निगरानी का कोई दुरुस्त सिस्टम नहीं है| बाल आश्रमों से बच्चे भागते रहते हैं क्योंकि वहाँ नरक जैसे वातावरण में किशोरों का दम घुटता है| बच्चे बेचने के लिए अनाथालय को मदद की की आड़ ली जाती है| केंद्र सरकार के निर्देश हैं कि बच्चा गोद देने से पहले प्रपत्र भरा कर जांच की जाए, गोद लेने वाले के स्तर रहन सहन की जांच की जाए और पालन पोषण की नियमित मानिटरिंग की जाए| नियम के मुताबिक़ सेन्ट्रल एडाप्शन रिसोर्स एजेंसी ने नियम तो बहुत सख्त बनाए हैं लेकिन इस तरह की झंझट से बचने के लिए जरुरतमंद दम्पत्ती चोरी छुपे बच्चा लेना चाहते हैं और इस तरह की मजबूरियों ने अनाथालय चलाने वाले शातिर पैदा कर दिए हैं|

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