गफलत की ताक में गुरिल्ले

गुरुवार, 1 जुलाई 2010


ज़रा सी गफलत और लाशों के ढेर ... ज़रा सी चूक और गोलियों की बौछार ... ज़रा सा बोझिल हुए और जंगल के घने झुरमुट में अचूक निशाने पर झांकती कातिल निगाहें स्वचालित हथियारों से लाशें गिनना शुरू कर देती हैं| नक्सलियों से निपटने के लिए दिल्ली से लेकर दंतेवाड़ा तक सुरक्षा दस्तों की लगातार चल रही कवायदों के बावजूद नक्सलियों ने ह्त्या का अपना पैटर्न नहीं बदला है| वे घात लगा कर बैठे रहते हैं और सुरक्षा बलों के शिविर के पास पहुचने का इंतज़ार करते हैं|
बुधवार की घटना में भी नक्सलियों ने झांसा दे कर मारने की अपनी पुरानी तरकीब से काम लिया और कई जवान शहीद हो गए| बीते हफ्ते जिला पुलिस के प्रधान आरक्षक राजेश कुजूर, आरक्षक संतोष यादव और अशोक मरकाम को नक्सलियों ने छुप कर गोली मार दी थी| अकस्मात् हमले के कारण पुलिसकर्मियों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। विगत ६ अप्रैल को भी दंतेवाडा में शिविर के लिए चले जवानों पर हमला हुआ था| जंगल के जानकारों की राय में दरअसल नक्सली अपने हमलों की तैयारी मनोवैज्ञानिक आधार पर करते हैं| वे जानते हैं कि कोई जवान जब गश्त के लिए जाएगा तो पूरे सफ़र में गंतव्य तक जोश में रहेगा| फिर आधे रास्ते में उसकी ऊर्जा कम हो जाएगी और जब जवान शिविर तक आएँगे और तब तक कोई मुठभेड़ नहीं होगी तो थके हुए जवान हमले के लिए मानसिक रूप से किसी और तरफ ध्यान बनता चके होंगे| यह चूक नक्सली गुरिल्लों के लिए आसान मौक़ा होती है जो आएगा, वे जानते हैं और हमेशा हमारे जवान उनके जाल में फंस जाते हैं|बुधवार की घटना में जवानों की संख्या सौ से भी कम थी और नक्सली लगभग ५०० बताए जा रहे हैं| नक्सलियों ने अपने खिलाफ पिछले साल भर से चल रहे आपरेशन ग्रीन हंट के बावजूद अपने नेटवर्क का विस्तार गाँव - गाँव तक कर लिया है और अंदेशा है कि नक्सलियों के मिलिट्री दलम ने इस वारदात को अंजाम दिया है|
चूक का फायदा उठाने में माहिर नक्सली अपने अचूक मुखबिर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह हैरत का विषय है कि जंगल में कई जगहों पर जहां मोबाईल तक काम नहीं करता उनको फ़ोर्स के आने व जाने की पूरी सूचना मिलती रहती है| नक्सलियों ने पहले धौड़ाई के पास मूमेंट कर के पुलिस को झांसा दिया और जब पलिस बल उस जगह से विजयी मुद्रा में लौट रहा था तब छुप कर गोलियां चला दी| नक्सली इस इलाके को दंद्कारन्य जोन में मानते हैं और इसे एक स्वतंत्र इलाका घोषित कर चुके हैं| कई कारणों से इस इलाके में विकास की किरण अत्यंत क्षीण है और पूरा इलाका साल के सघन वनों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा हुआ है| अबूझमाड़ इलाके में किमताड़ी गांव में हाल में पुलिस ने नक्सलियों के लिए हथियार बनाने वाली फैक्ट्री को उजागर किया था और जानकारों की राय में पुलिस व सुरक्षा बल नक्सलियों के इस किले में जिस प्रकार घुस कर सर्चिंग कर रहे हैं उससे वे बौखला उठे हैं | इसी वजह से अचानक हमले भी बढ़ गए हैं| | अबूझमाड़ ऐसा इलाका है जहां वर्षों से कोई सरकारी राजस्व सर्वेक्षण भी नहीं हो पाया है और सरकार का कोई भी कारिन्दा इस इलाके में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका है| नक्सलियों के सफाए में जुटी राज्य पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा दस्तों के आला अफसरों को इसकी सूचना काफी दिनों से थी कि अबूझमाड़ के कुछ गांवों में नक्सलियों के लिए हथियार बनाए जा रहे हैं मगर जानकार बताते हैं वर्षों तक इस मुद्दे की अनदेखी के जाती रही और भस्मासुर पैदा होते रहे| किसी तरह हिम्मत जुटा कर इस साल होली पर बाकायदा छापा मारा गया |नारायणपुर में ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू होने के बाद नक्सलियों की बन्दूक फैक्ट्री पकड़ने के दो मामले सामने आ चुके हैं| अबूझमाड़ इलाका लगभग महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश से सटा हुआ है|

7 comments:

माधव 1 जुलाई 2010 को 4:45 am  

concernm

Udan Tashtari 1 जुलाई 2010 को 5:23 am  

ठोस कदम उठाने होंगे इनको रोकने के लिए.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari 1 जुलाई 2010 को 6:51 pm  

नक्‍सली सूचना का मनोवैज्ञानिक विश्‍लेषण कर रणनीति तैयार करते हैं पर कायरों जैसा.

बढिया रिपोर्टिंग. धन्‍यवाद.

ललित शर्मा 1 जुलाई 2010 को 7:54 pm  

अच्छी पोस्ट-उम्दा रपट

आपकी पोस्ट ब्लाग4वार्ता में

विद्यार्थियों को मस्ती से पढाएं-बचपन बचाएं-बचपन बचाएं

सूर्यकान्त गुप्ता 1 जुलाई 2010 को 8:30 pm  

नक्‍सली सूचना का मनोवैज्ञानिक विश्‍लेषण कर रणनीति तैयार करते हैं पर कायरों जैसा.
सन्जीव भाई से सहमत्।

संगीता स्वरुप ( गीत ) 1 जुलाई 2010 को 11:05 pm  

उम्दा रिपोर्ट ....

shikha varshney 2 जुलाई 2010 को 4:29 am  

अच्छी रिपोर्ट है ..ठोस कदम उठाने की जरुरत है.

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