हिन्दी के साथ बहते हुए

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

अवसर था हिन्दी दिवस का और कोरबा में हिन्दी को मंच देने बालको नगर के प्रगति सभागार में हिन्दी प्रेमी जुटे| सरस्वती साहित्य समिति और बालको महिला मंडल ने एक वैचारिक आयोजन किया जिसमे "हिन्दी के उत्थान में बाधाएं" विषय पर लम्बे विमर्श का कुल निचोड़ यह रहा कि अब हिन्दी को कोई खतरा नहीं है| ख़तरा अंगरेजी को हो सकता है क्योंकि हिन्दी का भूगोल बढ़ रहा और अंगरेजी अब हिन्दी के शब्दों के सहारे अपना विकास कर रही है| हिन्दी तो एक बहती हुई नदी है जिसमे कंकड़-पत्थर को भी बहा ले जाने की क्षमता है|
मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार किशोर दिवसेजी (बिलासपुर) ने कहा कि हिन्दी को सिनेमा ने बढाया और मीडिया ने घर-घर में पहुंचा दिया है| हिन्दी को उतना खतरा नहीं है जितना प्रचारित होता है|हिन्दी को बढना है तो क्षेत्रीय भाषा और बोलियों को भी बढना होगा| हिन्दी में सबको साथ लेकर चलने की क्षमता है| वह जन-जन की भाषा है|
बालको के महाप्रबंधक श्री जितेन्द्र धीर ने कहा कि हिन्दी तो एक बहती हुई नदी है जिसका विस्तार विदेश में हो रहा है और हमारे देश के लाखों हिन्दी के राजदूत अपनी भाषा और संस्कृति की खुशबू परदेस में महका रहे हैं| हिन्दी का आँगन सदा हरा-भरा रहेगा | जरूरत इस बात की है कि हम भाषा के रूप में हिन्दी की स्वीकार्यता को बढ़ावा दें| मन में हिन्दी को जगह दें| कंपनी के संवाद प्रमुख श्री बी के श्रीवास्तव की राय थी कि हिन्दी को जनभाषा के रूप में उचित विस्तार दिया जाए और इसके कामकाजी भाषिक स्वरुप में क्लिष्टता को कम से कम किया जाए| बोलचाल की हिन्दी ही सर्वत्र वरेण्य है और यही भारत की नई पहचान है| उन्होंने बताया कि वेदान्त ने हिन्दी को लगातार बढ़ावा दिया है और आगे भी देता रहेगा| हिन्दी का परचम विश्व में लहरा रहा है और विदेश में भारत की साख हिन्दी से बनी है|
समिति की अध्यक्ष श्रीमती गीता विश्वकर्मा ने किरण पत्रिका का विमोचन कराया |लेखक के रूप में अपनी कृति "अंतर-द्वन्द" का विमोचन कराने के बाद अंचल के लेखक भुवनेश्वरप्रसाद देवांगन "नेही" का चेहरा खुशी से दमक रहा था| यह हिन्दी का सम्मान था और कई नए लेखक/प्रतियोगी बालको मंच से पुरस्कृत हुए| हिन्दी के मंच पर हिन्दी के निमित्त यह जो उदारता देखी गयी उससे वाकई लगा कि दीगर कारपोरेट कंपनियों को भी हिन्दी के उत्थान के लिए ऐसी ही उन्मुक्तता का कलेजा दिखाना चाहिए अन्यथा खानापूर्ति के लिए खानापूर्ति हिन्दी दिवस तो हैं ही|

3 comments:

ललित शर्मा 17 सितंबर 2010 को 7:13 am  

हिंदी दिवस की शुभकामनायें

Rahul Singh 17 सितंबर 2010 को 7:03 pm  

जानकारी मिली, धन्‍यवाद.

bahujankatha 27 सितंबर 2010 को 8:00 am  

किशोर दिवसे जी में एक जो बदलाव दिखाई दे रहा है वह यह कि अमिताभ वाली स्टाइल की दाढ़ी है या कहें कि उनकी वाली स्टाइल में अमिताभ दाढ़ी रखते रहे हैं। खैर, दिवसे जी से मुलाकात हुए एक अरसा हो गया है। आपने उनसे रूबरू करा दिया। देखें कब ऐसा हो पाता है। बहरहाल बड़ा अच्छा लगा।

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