अटल राजनीति

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010


भारतीय राजनीति के शलाका पुरुष सम्माननीय अटल बिहारी वाजपेयी कल अपना 87वां जन्म दिन मनाएंगे| राजनीति हो या समाज का कोई और भी क्षेत्र , अटलजी ने अपनी एक ऐसी साख बनाई है जो आज की तारिख में किसी और नेता की है यह कोशिश करके भी दावे से नही कहा जा सकता| धोती पहनने वाले, सादगी को आचरण में दर्शाने वाले और जो कहा सो कर दिखाने वाले नेताओं की परिदृश्य से गुम हो चुकी पीढी में अटलजी आज भी अग्रिम पंक्ति में हैं और सक्रिय न होते हुए भी अपनी चमक बिखेरे हुए हैं|

दिल्ली में उनके प्रधान मंत्रित्व काल की संसदीय रिपोर्टिंग से जुडी दो तीन घटनाएं हरदम याद आती हैं| एक तब, जब वे पहले बार पीएम बने मगर सिर्फ एक वोट से सरकार गिर गयी| तब प्रमोद महाजन जीवित थे और जोड़-तोड़ में माहिर थे मगर अटलजी ने जोड़-तोड़ से साफ़ मना कर दिया|

पद के लिए मूल्यों से समझौता नहीं करने का ऐसा जज्बा आज किस नेता में दिखता है?

संसद में लोक सभा की कार्यवाही उस रोज दिन भर और पूरी रात चली जब हिंदुत्व पर अटलजी का समापन भाषण आया| उसका सार यही था-हम स्वामी विवेकानंद के हिंदुत्व को मानते हैं जिसमे समरसता और उदात्त भावना है| संकीर्णता नहीं|

भाषण में सिद्धहस्त अटलजी को सुनते हुए एक पूरी पीढी बड़ी हुई है और कहना न होगा कि भाषण सुनने की वैसी ललक अब नई पीढी में नहीं है क्योंकि अटलजी जैसा भाषण देने वाले भी नहीं हैं| सरस्वती उनके कंठ में विराजती है| भाषण सुनने वाला उनका मुरीद हुए बिना नहीं रह सकता|
हे प्रभु मुझको इतनी ऊंचाई मत देना कि गैरों को गले न लगा सकूँ -जैसी पंक्तियाँ रच चुके अटलजी ने कविता को गहरे मानवीय सरोकार दिए और सब जानते हैं कि राजनीति में आने से पहले वे पत्रकार रहे हैं|

एक घटना मुझे याद आती है | तब वे नेता प्रतिपक्ष थे| इंडिया इंटरनॅशनल सेंटर में उनको साहित्य अकादमी वालों ने बुलाया था| कार्यक्रम के अंत में एक महिला ने तपाक से पूछा -अटलजी आपको क्या लगता है कि आप राम नहीं बन पाए या सीता को नहीं ढूंढ पाए ? उसी पल तत्काल जवाब आया- आप मिल ही गयी हैं अब दोनों मिल कर ढूंढ लेंगे|
हाजिर-जवाबी में माहिर और दूरंदेशी अटलजी ने जब परमाणु विस्फोट कराया तो दुनिया भर में भारत को अजीब नजरों से देखा गया| प्रतिबन्ध लगे| मगर अटलजी टस से मस नहीं हुए| कूटनीति में उनका भी जवाब नहीं रहा| उन्होंने दुनिया भर में दूत भेजे और देर-सबेर सबको मनवा लिया कि हम भी परमाणु शक्ति हैं|आज उस परीक्षण का असर यह है कि आए दिन युद्ध के धमकी देने वाले सदादुखी पड़ोसी अब शांत हैं| सबको साथ ले कर चलने की राह अटल जी ने चुनी| एन डी ए सरकार बना कर अटलजी ने गठबंधन राजनीति का एक नया अध्याय लिखा| उनकी सरकार पूरे समय तक चली| सेहत ने साथ नहीं दिया और वे खुद घोषणा कर गए कि अब प्रधान मंत्री नहीं बनूंगा वरना राजनीति के पंडित भी जानते हैं कि आज भी अटलजी अखिल भारतीय सर्वमान्य न सही मगर सारे नेताओं में सबसे अधिक बहुमान्य नेता हैं| उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की शुभकामना|

4 comments:

ललित शर्मा 24 दिसंबर 2010 को 7:35 am  

@पद के लिए मूल्यों से समझौता नहीं करने का ऐसा जज्बा आज किस नेता में दिखता है?

अभी तक तो नहीं दिखा। आगे की राम जाने। अटल जी जैसा व्यक्तित्व भविष्य में देखने मिल जाए तो देश को अवश्य ही एक नयी दिशा मिलेगी। परमाणु परीक्षण करना एक एतिहासिक और गौरवान्वित करने वाला फ़ैसला था। जिससे देश के हर नागरिक का सिर फ़क्र से ऊंचा हुआ। महाशक्तियों के भी कान खड़े हो गए और भारत की बात सुनने लगे।

वेद सुक्ति है
शस्त्र रक्षिते राष्ट्रे शास्त्र चर्चा प्रबर्तते
(जिस राष्ट्र की रक्षा शस्त्रों से होती हो वह चतुर्दिक उन्नति करता है।

शिवम् मिश्रा 24 दिसंबर 2010 को 7:38 am  

अटल जी को जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

Swarajya karun 24 दिसंबर 2010 को 10:38 am  

छत्तीसगढ़ ,झारखंड और उत्तराखंड राज्यों के निर्माता अटल जी भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय और सर्वाधिक मूल्यवान नेता हैं. उनके जन्म-दिन पर उन पर केंद्रित आलेख में ऐसा लगता है मानों उनके बारे में आपने हम सब की भावनाओं को भी शामिल कर लिया है.सुंदर और सार्थक आलेख . अच्छी प्रस्तुति . माननीय अटल जी के स्वस्थ,सुदीर्घ और यशस्वी जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं .

चण्डूखाने की हांडी 27 मार्च 2015 को 1:04 am  

अटल जी को जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
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