बस्तर / पत्रकार.. दोधारी तलवार..

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016




लगातार प्रेशर बम, लैंड माइन बिछे हुए इलाकों में काम कर रहे बस्तर  के  पत्रकार अब निरंतर भय के माहौल में काम कर रहे हैं...  हालात यह हैं  कि नक्सल प्रभावित इलाकों में पत्रकार दोधारी तलवार पर चल रहे है. पत्रकारों को यहां कोई “नक्सली एजेंट” समझता है तो कोई “पुलिस एजेंट”,.वे सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच पिस रहे हैं अब चूंकि क्योंकि कलम बंदूक से ज्यादा ताकतवर होती है.  लिहाजा इलाके के दमदार लोगों ने क़ानून को ही नही कलम को भी बंधक सा बना लिया है। अकबर इलाहाबादी ने कहा है कि तीर  निकालो ना तलवार निकालो गर मुक़ाबिल  हो तोप तो अखबार निकालो मगर बस्तर में  रहा है ऐसे हालात हैं कि पत्रकार को ही बाहर निकलो।शायद दुनिया से बाहर।
बस्तर  के  पत्रकार के लिए चित्र परिणाम मगर जुझारू पत्रकार डटे हैं यह मानकर कि सत्य परेशान तो हो सकता है ..पराजित नही|  पत्रकार एजिटेटेड हैं और अब सड़कों पर भी हैं| पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग करते हुए पत्रकार आंदोलन कर रहे हैंउनको दबाने वालो की यह गलतफहमी है कि कलम हमेशा के लिए दबेगी| एक अनुमान के मुताबिक बस्तर में करीब 300 पत्रकार काम कर रहे हैं.अब यह राष्ट्रीय सुर्ख़ियों का मुदा है क्योंकि पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति छत्तीसगढ़ ने बस्तर सहित पूरे प्रदेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के खिलाफ और पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर में प्रदर्शन किया।
 हाल में दंतेवाड़ा के पत्रकार प्रभात सिंह को भी आईटी एक्ट के एक मामले में जेल भेज दिया गया । बीजापुर के ही पत्रकार कमलेश पैकरा को पुलिस ने नक्सली मामले में गिरफ्तार किया था। कुछ दिनों पहले दरभा के पत्रकार संतोष यादव और सोमारू नाग को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा एक अन्य मामले में जगदलपुर के पत्रकार अनिमेश पाल को भी जेल जाना पड़ा था। प्रभात के खिलाफ़ स्कूल परिसर में जबरन घुसने, शिक्षकों और स्टाफ से हाथापाई करने और पैसे मांगने के कथित आरोप में एफआईआर पिछले साल हुई थी। अधिवक्ता महेंद्र दुबे के मुताबिक  प्रभात सिंह के खिलाफ की गयी लिखित शिकायत और एफआईआर के तथ्यों से प्रभात सिंह के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67, 67A और आईपीसी की धारा 292 का अपराध बनता ही नहीं है इसके बावजूद उसे बिना किसी कानून सम्मत कारण के गिरफ्तार किया जाना पुलिस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है।
मुख्य्मंत्री डा रमन सिंह  पत्रकार मामले में एक कमेटी बनने का एलान कर चुके हैं। कमेटी राज्य में पत्रकारों की समस्याओं को लेकर विशेष तौर पर गठित  की .
छत्तीसगढ़ में दो पत्रकारों की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ बस्तर -जगदलपुर में पत्रकारों के शुरू हुए आंदोलन के पहले दिन राज्य सरकार ने एलान कर दिया कि राज्य में पत्रकारों की समस्याओं को लेकर एक विशेष समिति गठित  की जाएगी। किसी भी पत्रकार की गिरफ्तारी के संबंध में 72 घण्टे के भीतर समिति को मिलने वाली शिकायत की जांच सरकार के पास उपलब्ध ठोस तथ्यों के आधार पर की जाएगी और आवश्यक हुआ तो संबंधित पत्रकार को राहत देने के लिए उपयुक्त निर्णय लिया जाएगा। बस्तर में दो पत्रकारों को कथित तौर पर नक्सली समर्थक बता कर गिरफ्तार किए जाने के विरोध में बस्तर के पत्रकार लामबंद हुए और धरना दिया गया। ये मुद्दा राज्य की विधानसभा में भी उठा ।

मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने रायपुर से टेलीफोन पर आंदोलित पत्रकारों के प्रतिनिधियों को यह भी आश्वासन दिया कि उनकी सुरक्षा के लिए राज्य सरकार सजग है और इसके लिए सभी जरूरी उपाय किए जाएंगे।
डा. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां की माटी पत्रकारिता एवं साहित्य की उर्वरा भूमि रही है। स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है। रमन सिंह ने बस्तर के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि पत्रकारों को भरोसे में लेकर काम करें.
  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर परिपत्र  में कहा गया है कि प्रदेश में समय-समय पर पत्रकारों के विरूद्ध आपारिधक प्रकरण दर्ज करने या गिरफ्तार करने की स्थिति में पत्रकारिता की स्वतंत्रता के मुददे पर सवाल उठते हैं। शासन को कई बार इस प्रकार की शिकायतें भी प्राप्त होती हैं कि किसी पत्रकार पर पुलिस कर्मियों द्वारा ज्यादती की गयी है, या उनके विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दुर्भावनावश कायम किया गया है।

पत्रकारों के निंमित्त जारी परिपत्र में दी गयी व्यवस्था इस प्रकार होगी -

(1) पत्रकारों पर ज्यादतियां होने की शिकायतों को संचालक जनसम्पर्क विभाग एकत्रित कर पुलिस मुख्यालय में कार्यरत उप पुलिस महानिरीक्षक (शिकायत) को भेजेंगे। संचालक जनसम्पर्क से प्राप्त प्रकरणों में पुलिस मुख्यालय द्वारा आवश्यक कार्रवाई किए जाने के बाद इसकी सूचना संचालक जनसम्पर्क को और प्रतिलिखि गृह विभाग को दी जाएगी।

(2) जहां तक पत्रकारों के विरूद्ध कोई प्रकरण कायम किए जाने का प्रश्न है, इस संबंध में राज्य शासन ने यह निर्णय लिया है कि यदि किसी भी (चाहे वह अभी स्वीकृत पत्र प्रतिनिधि हो या न हो) के विरूद्ध कोई प्ररकण कायम किया जाता है, तो उन प्रकरणों में चालान किए जाने के पहले उन पर उपलब्ध साक्ष्य की समीक्षा संबंधित पुलिस अधीक्षक और क्षेत्रीय उप पुलिस महानिरीक्षक कर लें और स्वयं को आश्वस्त कर लें कि कोई भी प्रकरण दुर्भावनावश या तकनीकी किस्म के स्थापित नहीं किए जाए। यदि उप महानिरीक्षक के मत में यह पाया जाए कि कोई प्रकरण दुर्भावनावश कायम किया गया है, तो तत्काल उनको समाप्त करने के निर्देश दिए जाएं और संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। इस कंडिका में यह भी कहा गया है कि बगैर समीक्षा किए हुए प्रकरणों का चालान न्यायालय में प्रस्तुत न किया जाए। प्रत्येक तिमाही में क्षेत्रीय उप पुलिस महानिरीक्षण इस प्रकार के प्रकरणों की समीक्षा करेंगे और वे पुलिस महानिदेशक को सूचना भेजेंगे। पुलिस महानिदेशक से यह सूचना गृह विभाग को भेजी जाएगी।

(3) यह व्यवस्था यथावत जारी रहेगी। इसके अन्तर्गत उप पुलिस महानिरीक्षक के स्थान पर अब पुलिस महानिरीक्षक (रेंज) कार्रवाई करेंगे।

(4) उपरोक्त व्यवस्था के अतिरिक्त शासन स्तर पर एक उच्च स्तरीय समन्वय समिति का भी गठन किया गया है, जो पत्रकारों और शासन के बीच आपराधिक प्रकरणों और संबंधित विषयों में आवश्यक समन्वय स्थापित करने की कार्रवाई करेगी। समन्वय समिति के अध्यक्ष सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव होंगे। समिति में गृह (पुलिस) विभाग के सचिव, पुलिस मुख्यालय की अपराध अनुसंधान शाखा के प्रभारी अधिकारी और शासन द्वारा नामांकित दो वरिष्ठ पत्रकार सदस्य होंगे। समन्वय समिति में जनसम्पर्क विभाग के संचालक सदस्य सचिव होंगे। समिति द्वारा संबंधित रेंज पुलिस महानिरीक्षक को भी आवश्यकतानुसार आमंत्रित किया जा सकता है।

(5) उपरोक्त समन्वय समिति के संदर्भ की शर्ते इस प्रकार होंगी - परिपत्र की कंडिका-2 में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार यदि कार्रवाई से संतुष्टि नहीं होती है, तो उन प्रकरणों में उच्च स्तरीय समन्वय समिति द्वारा विचार किया जाएगा। समिति द्वारा विचारण से संबंधित मामले के चयन का अधिकार संचालक जनसम्पर्क के पास रहेगा।  पत्रकार के रूप मंे किए गए किसी कार्य के कारण पत्रकारो के विरूद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों के संबंध में यह उच्च स्तरीय समन्वय समिति पुलिस और पत्रकारों के बीच समन्वयक की भूमिका का निर्वहन करेगी। समिति पुलिस और पत्रकारों की ओर से आवश्यक सूचना और जानकारियों को आदान-प्रदान करेगी। इसके लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त करने और प्रकरण से जुड़े पक्षों को बुलाने के लिए समिति आवश्यक निर्देश भी जारी करेगी।

परिपत्र की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक और सामान्य प्रशासन विभाग तथा जनसम्पर्क विभाग के सचिवों सहित समस्त संभागीय कमिश्नरों, कलेक्टर और जिला दण्डाधिकारियों, रेंज पुलिस महानिरीक्षकों और सभी पुलिस अधीक्षकों को भी भेजी गयी है।
छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के लिए बनी बीमा एवं सम्मान निधि (पेंशन योजना) की तकनीकी खामियों को दूर करने एवं वेतन बोर्ड की सिफारिशों को प्रदेश स्तर पर लागू करवाने की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल  ने राज्यपाल बलरामजी दास टंडन से मिलकर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि सम्मान निधि (पेंशन योजना) में सेवानिवृत्त पत्रकार इसलिए पात्र नहीं माने जा रहे है क्योंकि विभिन्न समाचार पत्रों में काम करने के बाद भी जनसंपर्क विभाग में उनकी अधिमान्यता नहीं रही है। 

2 comments:

ब्लॉग बुलेटिन 15 जुलाई 2016 को 10:03 am  

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " भ्रम का इलाज़ - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

GathaEditor Onlinegatha 16 जुलाई 2016 को 12:50 am  

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