कनाडाई युवक अंततः रिहा

गुरुवार, 30 मार्च 2017


बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में एक कनाडाई युवक को अंततः नक्सलियों ने रिहा कर दिया। 25 वर्षीय जॉन सेजेलक के नक्सली चंगुल में फंस जाने की खबर ने रायपुर से दिल्ली और कनाडा तक सबके हाथ पाँव फुला दिए थे।  कनाडाई नागरिक जान सजलाक साईकिल यात्रा पर इलाके में आया था और फिर 27 मार्च को लापता हो गया। विदेश मन्त्री सुषमा स्वराज के ट्वीट ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बना दिया था।   

नक्सल मामलों के डीजी डीएम अवस्थी के अनुसार जॉन को नक्सलियों ने लंबी पूछताछ के बाद रिहा कर दिया। सुकमा के एसपी अभिषेक मीणा ने बताया, 'सजलाक को अरनमपल्ली के जंगलों में छोड़ा गया 
यह विदेशी नागरिक इस महीने की 14 तारीख को मुंबई से साईकिल से निकला था और वह 27 तारीख को सुकमा पहुंचा। फॉरेन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत सभी विदेशियों को स्थानीय थाने में आमद दर्ज करवानी होती है लेकिन जॉन की तरफ से ऐसी कोई इत्तला दर्ज नहीं हुई।  नक्सली संघम  सदस्यों ने उसे पकड़ा और अपने मिलिट्री कमांडरों के हवाले कर दिया। इसके बाद हंगामा मचने पर चौतरफा प्रयास शुरू हुए और कनाडा से ले आकर दिल्ली तक हड़कंप मैच रहा।  
 बस्तर से कनाडाई सामाजिक कार्यकर्ता के अचानक गायब होने के मामले में केंद्र सरकार के स्तर पर भी चिंता जताई गई। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बातचीत कर तुरंत जानकारी देने कहा। 
सुषमा स्वराज ने दो ट्वीट में लिखा-हम अवाक हैं। मैंने ओडिशा सरकार से जानकारी मांगी है। सुषमा ने दोबारा ट्वीट कर कहा कनाडियन नागरिक को ओडिशा के कोरापुट में बंधक बनाए जाने की बात कही और लिखा - मामले में मैने ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक से बात की है। सुषमा स्वराज ने ओडीशा सरकार से इस कथित किडनैपिंग के पूरे मामले की रिपोर्ट भी मांगी है। सजलाक कनाडा स्थित संगठन इमीग्रेशन रिफ्यूजी सिटीजन से जुड़े हैं।

  जिस जगह पर उसकी लोकेशन बताई जा रही वह इलाका घोर नक्सल प्रभावित है। यह इलाका नक्सली मिलिट्री बटालियन के हिडमा का इलाका है। जॉन की साइकिल में एक जीपीएस डिवाइस लगा हुआ है। जब जॉन सुकमा जिले के किस्टाराम थानाक्षेत्र में सिंगामड़गु पहुंचे और ग्रामीणों ने उसको रोक।  इसके बाद खतरे का आभास होने पर जॉन ने अपने जीपीएस में लगे रेड बटन को दबाया।  रेड बटन के दबते ही डिवाइस ने अमेरिका के न्यूयार्क सिटी में जॉन के मुसीबत में फंसने के संकेत भेजे जिसे डिवाइस निर्माता कंपनी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन -इसरो को भेज जॉन की लोकेशन पता लगाने की कोशिश की। इसरो ने जब जीपीएस द्वारा दिए गए आंकड़ो की जाँच की तब जॉन की लोकेशन सुकमा के सिंगामड़गु में मिली | इलाक़ा छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा की सीमा पर स्थित है। रिहाई के लिए नक्सलियों से संपर्क रखने वाले सामाजिक कार्यकर्त्ता भी सक्रिय हो गए।   

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