यूट्यूब पर यायावर रमेश
बुधवार, 22 मार्च 2023
सभी मित्र ब्लॉग के साथी यूट्यूब पर भी यायावर की वीडियो पोस्ट देख सकते हैं। सुस्वागतम।
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Read more...आदरणीय रमेश नैयर जी ने लोक की यात्रा पूरी कर ली और देवलोक को गमन कर गए हैं लेकिन उनकी यादें हमेशा जीवंत प्रकाशित रहेंगी। हमारे दिलों में वे सदा रहेंगे।
स्व. रमेश नैयर ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी पत्रकारिता के प्रतिमान स्थापित किये। वे अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से नयी पीढ़ी के #पत्रकारों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।
बताने की जरूरत नहीं, वे पत्रकारों के पत्रकार थे संपादकों के #संपादक थे और अर्ध शताब्दी से उनका नाम चमकता रहा है।
नैयर जी उस पीढी से थे जिसने हमेशा सत्य का साथ दिया। वह हमेशा सत्य पर अडिग रहे।
#मुख्यमंत्री #भूपेशबघेल ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि स्व. नैयरजी ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी पत्रकारिता के प्रतिमान स्थापित किये हैं। वे अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से नयी पीढ़ी के पत्रकारों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।
नैयर जी का जीवन सादगी से भरा हुआ था जब परिवार के साथ वक्त देते थे लेकिन समाज के लिए भी समर्पित थे उनको अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया। उनके निधन की सूचना से पूरे पत्रकार जगत में शोक की लहर व्याप्त हो गई।
सम्मान का कोई भी मंच हो नैयर जी की जगह सुरक्षित थी। विमोचन हो या पुरस्कार वितरण तक।
नैयर सर से जुड़े अनेक संस्मरण हैं। वे नौजवानों को प्रोत्साहित करने वाले सम्पादक थे। उनके अपने स्थापित मानदंड थे जिन पर वे उम्र भर कायम रहे l मां सरस्वती उनके कंठ में विराजमान रहती थी और जब वे दिल से लिखते थे तो जमाना गौर से पढ़ता था।
प्रिंट मीडिया से बेशक नैयर जी ने शुरुआत की थी लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी वे सिद्धहस्त वक्ता थे।
आशावाद और उम्मीद नैयर जी की पत्रकारिता के केंद्र बिंदु थे उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे दो टूक समीक्षक थे।
जब #करोना_वायरस फैला तो नैयर जी भी महामारी के खिलाफ डीपीआर छत्तीसगढ़ द्वारा शुरू किए गए जन जागरूकता अभियान में सीना तान कर समाज को #जागरूक बनाने आगे आए।
वे पत्रकारिता जगत के सिद्धहस्त पुरोधा और प्रकाशमान नक्षत्र थे।समाज सेवा में भी अग्रणी थे।
उनकी #कलम की धार बहुत पैनी थी और उस कलम में एक सजग नागरिक सजग पत्रकार सर्जक संपादक सर्जक समाजसेवी नजर आता था।
विचार कभी नही मरते। उनका यूं जाना शोक का इसलिए कारण नहीं, क्योंकि वे वे पंच महाभूत में विलीन हुए हैं, देह से मुक्त हुए हैं, विचारों में लेखों में सदा अमर रहेंगे।
रमेश नैय्यर का जाना पत्रकारिता में बौद्धिक खालीपन उत्पन्न करेगा। मगर वो पत्रकारिता जगत के ध्रुव सितारे हैं। उनकी प्रेरणा कई युवाओं को दिशानिर्देशित करेगी।
वे सदैव हम सबके बीच में नहीं हैं लेकिन उनके विचार आने वाले कई वर्षों तक हम सब पत्रकारों को अनुप्राणित करते रहेंगे।
रमेश नैयर जी मूल्यों के पक्षधर थे। उन्होंने मीडिया में यह बात अपने तइ स्थापित की कि हमेशा सच के साथ चलो और वे जीवनभर सच के मूल्यों के प्रहरी बने रहे।
आदरणीय रमेश नैयर जी हम सब पत्रकारों के प्रेरणा स्रोत रहे हैं।
उनको मेरा शत-शत नमन
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https://youtu.be/ZJIvrfH0S7Q
रायपुर। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारियां जोरों पर हैं जबकि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में उनकी माता कौशल्या के भव्य मंदिर का भी निर्माण काम चल रहा है। 15करोड़ रुपयों की लागत से भव्य मन्दिर बनाया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर के समीप माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी में पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह घोषणा की। बघेल अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल और परिवार के सदस्यों के साथ चंदखुरी पहुंचे और वहां स्थित माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर में उन्होंने पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के सौन्दर्यीकरण और परिसर के विकास के लिए तैयार परियोजना की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर के सौन्दर्यीकरण के दौरान मंदिर के मूलस्वरूप को यथावत रखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार राम वन गमन पथ पर पड़ने वाले महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसकी शुरूआत चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य के बीते 22 दिसम्बर को भूमि-पूजन के साथ कर दी गई है। भव्य मंदिर की निर्माण की कार्ययोजना में परिसर में विद्युतीकरण, तालाब का सौंदर्यीकरण, घाट निर्माण, पार्किंग, परिक्रमा पथ का विकास आदि कार्य शामिल किए गए हैं।
बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहां कण-कण में भगवान राम बसे हुए है। भगवान राम ने वनवास का बहुत सा समय यहां व्यतीत किए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भगवान राम के वन गमन मार्ग को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित कर रही है ताकि इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सके। 15 करोड़ की लागत से सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर यहां तालाब के बीच से होकर गुजरने वाले पुल की मजबूती के साथ ही यहां परिक्रमा पथ, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और शौचालय बनाने कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौन्दर्यीकरण कार्य का भूमिपूजन हो गया है यहां अगस्त के तीसरे सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणों की मांग पर मंदिर के पास से बायपास सड़क की स्वीकृति प्रदान करते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। वहीं ग्राम वासियों की सहुलियत को देखते हुए चंदखुरी में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिए है।
गौरतलब है कि त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कोसल एवं दण्डकारण्य के रूप में विख्यात था। प्रभु श्रीराम ने उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश के बाद विभिन्न स्थानों पर चौमासा व्यतीत करते हुए दक्षिण भारत में प्रवेश किया गया था। छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले की गवाई नदी से होकर सीतामढ़ी हरचौका नामक स्थान से प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। इस दौरान उन्होंने 75 स्थलों का भ्रमण करते हुए सुकमा जिले के रामाराम से दक्षिण भारत में प्रवेश किया था। उक्त स्थलों में से 51 स्थल ऐसे है, जहां प्रभु श्रीराम ने भ्रमण के दौरान रूक कर कुछ समय व्यतीत किया था। प्रथम चरण में इनमें से 9 स्थलों को विकसित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पथ का, पर्यटन की दृष्टि से विकास की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य में आने वाले पर्यटकों, आगन्तुकों के साथ-साथ देश और राज्य के लोगों को भी राम वन गमन मार्ग एवं स्थलों से परिचित कराना एवं इन ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के दौरान पर्यटकों को उच्च स्तर की सुविधाएं भी उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पर्यटन परिपथ को विकसित करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में 09 स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अम्बिकापुर), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर), रामाराम (सुकमा) शामिल हैं। राम वन गमन पर्यटन परिपथ में प्रस्तावित 09 स्थलों को लेते हुए पर्यटन विभाग द्वारा एक कॉन्सेप्ट प्लान तैयार किया गया है, जिसकी लागत 137.45 करोड़ रूपए है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ हेतु राज्य शासन द्वारा गत वर्ष (2019-20) राशि 5 करोड़ रूपए और इस वर्ष (2020-21) 10 करोड़ रूपए का प्रावधान बजट में किया गया है। इस तरह कुल राशि रूपए 15 करोड़ राज्य शासन द्वारा स्वीकृति दी गई है।

सवाल इस्तीफे का नहीं है। इस मामले में जो भी कदम उठाए जाने थे, उठाए गए और जिनके खिलाफ कार्रवाई जायज थी, वह हुई। अब राजनीति की जानी है तो इस संवेदनशील मुद्दे पर नहीं होनी चाहिए। और भी कई मुद्दे हैं।
सुबह एक अच्छी खबर से दिन का आगाज हुआ| खबर है कि छत्तीसगढ़ सरकार आगामी अक्टूबर माह में बुजुर्ग लोगों के लिए एक विशेष अभियान चलाएगी जिसमे एक जगह पर शिविर लगा कर उनके स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर जरूरी मुफ्त चीजों के वितरण तक के कार्य संपन्न होंगे| यह खबर अखबार में प्रथम पृष्ठ पर नहीं किसी भीतरी पन्ने के निचले पायदान पर मिली लेकिन खबर ने मन को प्रसन्न किया| मैं जानता हूँ कि ऐसी वास्तविक मदद वाली योजना का खाका होता तो सबके मन में है मगर अमल में लाने का हौसला दिखाने वाले ही सराहे जाते हैं| दिल्ली में डा. हर्षवर्धन जब स्वास्थ्य मंत्री थे तब वे इसी तरह के अनूठे काम हाथ में लेते थे और यह बताने की जरुरत नहीं है कि भारत से पोलियो को उखाड़ फेंकने के वृहत अभियान चलाने का बीड़ा डा. हर्षवर्धन ने ही उठाया था| अब डा. रमन सिंह ऐसे कामों को आगे बढ़ा रहे हैं तो यकीनन उनकी साख और लोगों के दिल में उनके प्रति सम्मान में बढ़ोतरी ही होगी| राजनीति में एक चीज साफ़ दिख रही है कि जहां भी पढ़े लिखे लोग सत्ता या विपक्ष में हैं वहां चीजें बदल रही हैं | नजरिया बदला है और एक दिन शायद आए जब नेताओं से तौबा करने वाली जनता सचमुच अपने नायकों के ऊपर फख्र करे|
बताने की जरुरत नहीं है कि हमारे देश में बुजुर्गों की औसतन क्या स्थिति है| वे सिर्फ एक चलते-फिरते या सोए हुए या अध् सोए ऐसे सदस्य समझे जाते हैं जिनसे यही उम्मीद की जाती है कि टाईम पर खा लें और चुपचाप पड़े रहें| बोलना हो तो पूजाघर में सिर्फ मन्त्र बोलें या शादी ब्याह या किसी अन्य मौके पर आशीष वचन बोलें वरना चुप ही रहें|
भारत में एक हज़ार से भी अधिक वृद्धाश्रम हैं। वहाँ जा कर देखा जा सकता है कि यह वही देश है जहां वानप्रस्थ की कल्पना की गयी थी मगर समय ने सब कुछ बदल दिया और जिनको पकी उम्र में सहारा मिलना था वे बेसहारा कर के छोड़ दिए जाते हैं| कोई उनसे दो बोल भी नहीं बोलना चाहता है | आज घर से चला तो मुझे सड़क पर एक सज्जन दिख गए| वे साइकिल थामे चले जा रहे थे| मैंने मुस्करा कर देखा और रुका तो वे समझे कि मैं उनका कोई परिचित हूँ| वे लगे बताने- उम्र हो गयी है 90 साल | बस कट रही है| वगैरह वगैरह .. मैं आश्चर्य से भरा देखता रहा गया नब्बे की साल उम्र !! सड़क पर अकेले साइकिल थामे| प्रणम्य सेहत | ऐसा ही होता है| लोग चलते रहते हैं जब तक चल सकें| कुछ घरों में जरा सी दिक्कत पर डाक्टर बुला लिए जाते हैं मगर फिर भी तकलीफें हजार |
भारत सरकार की सीनियर सिटीजन की सुविधाओं को दर्शाने वाली वेबसाईट बताती है कि छत्तीसगढ़ में एक भी वृद्धाश्रम नहीं है? शायद इसका कारण कोई बता सके| मुझे लगता है कि अभी वो कल्चर यहाँ नहीं आया है जिसमे लोग पकी उम्र में ऐसे ठिकानों पर ढकेल दिए जाने के लिए मजबूर कर दिए जाते हैं| मगर इससे यह नतीजा निकाला नहीं जा सकता है कि यहाँ बुजुर्ग बहुत मजे में हैं| उनकी तकलीफें कम करने की दिशा में सरकार आगे आ रही है तो इसे एक सकारात्मक पहल ही माना जाए और दुआ कि वृद्धजन दिवस ( 1 अक्टूबर ) आशानुरूप मनेगा|
अवसर था हिन्दी दिवस का और कोरबा में हिन्दी को मंच देने बालको नगर के प्रगति सभागार में हिन्दी प्रेमी जुटे| सरस्वती साहित्य समिति और बालको महिला मंडल ने एक वैचारिक आयोजन किया जिसमे "हिन्दी के उत्थान में बाधाएं" विषय पर लम्बे विमर्श का कुल निचोड़ यह रहा कि अब हिन्दी को कोई खतरा नहीं है| ख़तरा अंगरेजी को हो सकता है क्योंकि हिन्दी का भूगोल बढ़ रहा और अंगरेजी अब हिन्दी के शब्दों के सहारे अपना विकास कर रही है| हिन्दी तो एक बहती हुई नदी है जिसमे कंकड़-पत्थर को भी बहा ले जाने की क्षमता है|
मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार किशोर दिवसेजी (बिलासपुर) ने कहा कि हिन्दी को सिनेमा ने बढाया और मीडिया ने घर-घर में पहुंचा दिया है| हिन्दी को उतना खतरा नहीं है जितना प्रचारित होता है|हिन्दी को बढना है तो क्षेत्रीय भाषा और बोलियों को भी बढना होगा| हिन्दी में सबको साथ लेकर चलने की क्षमता है| वह जन-जन की भाषा है|
बालको के महाप्रबंधक श्री जितेन्द्र धीर ने कहा कि हिन्दी तो एक बहती हुई नदी है जिसका विस्तार विदेश में हो रहा है और हमारे देश के लाखों हिन्दी के राजदूत अपनी भाषा और संस्कृति की खुशबू परदेस में महका रहे हैं| हिन्दी का आँगन सदा हरा-भरा रहेगा | जरूरत इस बात की है कि हम भाषा के रूप में हिन्दी की स्वीकार्यता को बढ़ावा दें| मन में हिन्दी को जगह दें| कंपनी के संवाद प्रमुख श्री बी के श्रीवास्तव की राय थी कि हिन्दी को जनभाषा के रूप में उचित विस्तार दिया जाए और इसके कामकाजी भाषिक स्वरुप में क्लिष्टता को कम से कम किया जाए| बोलचाल की हिन्दी ही सर्वत्र वरेण्य है और यही भारत की नई पहचान है| उन्होंने बताया कि वेदान्त ने हिन्दी को लगातार बढ़ावा दिया है और आगे भी देता रहेगा| हिन्दी का परचम विश्व में लहरा रहा है और विदेश में भारत की साख हिन्दी से बनी है|
समिति की अध्यक्ष श्रीमती गीता विश्वकर्मा ने किरण पत्रिका का विमोचन कराया |लेखक के रूप में अपनी कृति "अंतर-द्वन्द" का विमोचन कराने के बाद अंचल के लेखक भुवनेश्वरप्रसाद देवांगन "नेही" का चेहरा खुशी से दमक रहा था| यह हिन्दी का सम्मान था और कई नए लेखक/प्रतियोगी बालको मंच से पुरस्कृत हुए| हिन्दी के मंच पर हिन्दी के निमित्त यह जो उदारता देखी गयी उससे वाकई लगा कि दीगर कारपोरेट कंपनियों को भी हिन्दी के उत्थान के लिए ऐसी ही उन्मुक्तता का कलेजा दिखाना चाहिए अन्यथा खानापूर्ति के लिए खानापूर्ति हिन्दी दिवस तो हैं ही|

दृश्य एक : रायपुर शहर, गौरव पथ में रात का नजारा . लगता है कनाट प्लेस में टहल रहे हैं..| नियोन साईन बोर्ड और लकदक करती लाईटें, कृत्रिम झरना और फव्व्वारे ...चमकती हुए सड़क पर भागती हुई कारें ...लगता है छत्तीसगढ़ का नवा बिहान(नया सवेरा) यहीं हुआ है|
दृश्य दो; बागबाहरा-जिला महासमुंद, रायपुर से महज 90 किलोमीटर दूरस्थ महासमुंद जिले का यह सीमान्त इलाका बदहाली के दिन गिन रहा है| मुख्य राजमार्ग पर पूरे दस किलोमीटर सड़क पर सिर्फ कीचड और नुकीले पत्थर हैं| आसपास गांवों में सहूलियतें सिफर| सड़क पर चलना हो तो गाडी में अतिरिक्त पहिया रख लें. ख़ास बात यह है कि पुलिसिया उदासीनता के कारण अब यहाँ भी बस्तर वाली लाल बयार खुल कर गावों में बहने लगी है और शायद किसी दिन धमाकों के साथ इलाके का नया परिचय दुनिया के सामने आए|
इस दृश्य की चर्चा यूँ कि एक अच्छी खबर बीते दिनों आई-दिल्ली से, दस साल पहले एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ ने पिछले दस वर्षों में बीमारू और अविकसित कहे जाने वाले सदियों पुराने कलंक को धो कर विकास दर के मामले में राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया है और कई बड़े राज्यों से होड़ कर ली है| यह एक अच्छा संकेत रहा है और इसके लिए सरकार- प्रशासन को यकीनन शाबासी मिलनी चाहिए लेकिन जिस राज्य में शान्ति के लिए प्रख्यात रहे घने जंगल रोजाना होने वाले धमाकों से थर्रा रहे हों, विनाश दर की लाल छलांग अंतर्राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गयी हो और नक्सली मोर्चे पर जवानों की शहादत की लिस्ट देश भर के मुकाबले अव्वल हो वहाँ इस तरह के खिताब केवल कागजी संतोष दे सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा एक सरकारी सुकून, जिसकी आंकड़ेबाजी अर्थशास्त्री ही ज्यादा समझ सकते हैं, अपन नहीं|
एक ख़ास बात तो यह भी है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद छत्तीसगढ़ बढ़ा, यह भी कोई कम अचम्भे की बात नहीं है| राज्य को बनना था तो बढना ही था, अपने को तो उसी दिन राज्य का भविष्य दिखाई दे रहा था जिस दिन राज्य बना और तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री रमेश बैस ने खुश हो कर मिठाई भेजी| इन दस सालों में दो तरह का छत्तीसगढ़ बनता दीख रहा है| एक शहर वाला , एक गाँव कस्बों और छोटे शहरों वाला , फर्क साफ़ किया जा सकता है| अपराध बढ़ रहे हैं, समाज रोज बदल रहा है| जमीनों के सौदों में दलाल लाल हो रहे हैं और बेचने वाले बर्बादी की तरफ बढ़ते दीख रहे हैं| एक ग्रामीण पीढी होंडा गाड़ियों में भागती हुई दिखाई दे जाती है| अचानक जमीन की कीमत बढ़ गयी तो उनके सौदे होने लगे और किसानी से मुंह चुराने वाली पीढी ने शहरों का रुख करना शुरू कर दिया है| दिल्ली-गुडगाँव- फरीदाबाद में जाट-गुर्जर किसानों की नई पीढी के साथ जो हुआ था वैसा ही यहाँ होता दीख रहा है|सब कुछ बेचो और एक बढ़िया कार खरीदो- इस मानसिकता का असर देखा जा रहा है|
रायपुर में अपराध की स्थिति यह है कि 1980 -90 के दशक में आजाद चौक पर दो गुटों के बीच झगडे में चाकू निकलता था तो दो कालम की खबर बनती थी| अब रोज़ ह्त्या और लूट की ख़बरें राज्य की प्रगति के साथ बोनस में आई हैं| पहली नवंबर को प्रदेश की स्थापना के 10 साल पूरे हो रहे हैं। राज्य बना और शहरीकरण बढ़ गया| शहरों में भीड़ बढ़ गई है| एक छत्तीसगढ़ जो रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और दीगर शहरों में नजर आता है जहां कुछ ख़ास इलाकों में साफ़ सड़कों का शहरी रूतबा है,प्रगति पथ की धाक है, हाई मास्ट लाईटें ग्रामीण आगंतुक को शहरी रुतबे से सहमा देती हैं| .... और दूसरी तरफ बहुतेरे छोटे कस्बे हैं जहां बारिश में चलना मुहाल है |
लोग मुफ्त में चावल ले रहे हैं मगर सब्जी नहीं खरीद पा रहे हैं| मोबाईल बजते हैं, लडकियां साइकिल पर स्कूल जाती दीखती हैं मगर बारिश मे उनके पास रेन-कोट नहीं हैं| धमतरी एक जिला मुख्यालय है| वहा जा कर लौटा हूँ| सदर बाजार जैसी मुख्य सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि सड़क में गड्ढे या गड्ढे में सड़क वाला जुमला याद आता रहा| धन्य हैं जनप्रतिनिधि और धन्य है नगर पालिका| यह वही शहर है जो पूरे रायपुर शहर को गर्मियों में गंगरेल बाँध का पानी पिलाता है मगर शहर में नागरिक प्रशासन नाम की चीज नजर नहीं आती|
बहरहाल यह राज्य सरकार या प्रशासन की उपलब्धि की विरोधी दल मार्का आलोचना नहीं है और यह अवसर ऐसे मुद्दे उठाने का भी नहीं है| लेकिन सवाल तो उठते ही हैं| बहरहाल दस साल में कई मुकाम तय करके दस वर्षीय छत्तीसगढ़ के लड़कपन को अब जवानी की तरफ बढ़ते देखना है| विकास दर के मामले में शीर्ष पर आने के मौके पर राज्य में एक स्लोगन जारी हुआ है- क्रेडिबल छत्तीसगढ़| मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने कहा कि यही इस प्रतीक वाक्य की रचना की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि पहले छत्तीसग़ढ की पहचान अपार प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण एक ऐसे राज्य के रूप में थी, जो देश की आजादी की लगभग आधी शताब्दी गुजर जाने के बाद भी पिछड़ेपन की छाया से मुक्त नहीं हो पाया था। राज्य में सामाजिक-आर्थिक विकास के अनेक क्षेत्रों में कई अभूतपूर्व और महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की गयी हैं। राज्य के संसाधनों में विकास की क्षमता के प्रति भी राज्य के भीतर और बाहर विश्वास की एक नई लहर देखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हीं भावनाओं को शामिल करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य के नए प्रतीक ‘ विश्वसनीय छत्तीसगढ़’ की रचना की गई है। इसमें हर रंग राज्य की वन-संस्कृति और कृषि-संस्कृति का प्रतीक है। नई दिल्ली के प्रगति मैदान पर 14 से 27 नवंबर तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ की दस साल की विकास यात्रा भी प्रदर्शित की जाएगी। प्रदेश की लोक कला और लोक संस्कृति के साथ वर्किंग मॉड़ल प्रस्तुत किए जाएंगे। क्लीन एंड एनर्जी एफिशिएंट टेक्नालाजी प्रोडक्ट एंड सर्विसेस। इसी थीम के आधार पर राज्य के क्रेडा, ऊर्डा, वन, सीएसईबी, पर्यावरण मंडल, औद्योगिक इकाईयों आदि विभागों के वर्किंग मॉडल पेश किए जाएंगे।
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